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किसान आंदोलन की आग में झुलसा पंजाब-हरियाणा, करोड़ों का नुकसान

Sun, 11 Jun 2017 09:38 AM IST
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हड़ताल की वजह से फंसे ट्रक - फोटो : File Photo
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हिंसक हो चुके किसान आंदोलन की जो तस्वीरें और तथ्य सामने आ रहे हैं, वो बहुत ही डरावने और भयावह हैं। आंदोलन की वजह से नुकसान दूसरे राज्यों को भी हो रहा है। मध्यप्रदेश के किसान आंदोलन की आग में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और चंडीगढ़ का कारोबार भी झुलसने लगा है। बीते एक हफ्ते से तीनों राज्यों के उद्योग इस आंदोलन से खासे प्रभावित हुए हैं। मध्यप्रदेश जाने वाला तैयार माल यहीं पड़ा है और वहां से आने वाला रास्ते में ट्रकों में फंसा है।
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दूसरी ओर एक हफ्ते के भीतर यहां के ट्रांसपोर्टरों को करीब 275 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। तीनाें राज्यों के करीब 16 हजार से अधिक ट्रक मध्यप्रदेश के भीतर व बार्डर पर अटके पड़े हैं। जबकि 79 ट्रकों को आंदोलन में आगजनी के हवाले कर दिया गया है। इस घटना से ट्रांसपोर्टर काफी भयभीत हैं।

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्टर कांग्रेस के चेयरमैन कुलतरण सिंह अटवाल ने बताया कि मध्यप्रदेश में हजारों ट्रक फंसे हुए हैं, इस कारण से ट्रांसपोर्टर डरे हुए हैं, क्योंकि वहां काफी नुकसान हो चुका है। उन्होंने बताया कि चारों राज्यों में ही ट्रांसपोर्टरों को एक हफ्ते में करीब 280 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। क्योंकि कोई भी ट्रांसपोर्टर इस वक्त दक्षिण भारत में गाड़ी भेजने को तैयार नहीं है। उनके अनुसार जो भी ट्रक साउथ इंडिया से माल लेकर आते व जाते हैं, वे मध्यप्रदेश से ही होकर जाते है और इस वक्त काफी संख्या में ये ट्रक वहीं फंसे हैं।
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मध्यप्रदेश में फंसी खाद्य पदार्थों की खेप

ट्रकों में फंसा सामान - फोटो : File Photo
हरियाणा से काफी माल दक्षिण भारत जाता है और काफी माल वहां से वाया मध्यप्रदेश यहां आता है। लेकिन पिछले एक हफ्ते से हरियाणा के उद्योगों की हालत बहुत पतली हो गई है। हरियाणा के थोक दाल कारोबारी प्रवीण मित्तल ने बताया कि मध्यप्रदेश से इस सीजन में गेहूं की खपत हरियाणा में बहुत अच्छी है।

लेकिन इस वक्त काफी माल ट्रकों में ही फंसा है, इसलिए कारोबार को बहुत नुकसान हो रहा है। थोक सब्जी कारोबारी अनिल तिवारी के अनुसार, प्याज वाया एमपी ही हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में पहुंचता है, लेकिन उसकी सप्लाई कम हो रही है।

 हरियाणा के इन उद्योगों की हालत पतली
साइंस इंस्ट्रूूमेंट्स कारोबारी राजीव अग्रवाल के अनुसार, मध्यप्रदेश साइंस इंस्ट्रूमेंट्स का बड़ा बाजार है। वहां से काफी आर्डर मिलता है और माल भी तैयार है। लेकिन साइंस उद्यमी इस तैयार माल को इस वक्त एमपी में भेजने का रिस्क नहीं ले सकता है, लेकिन इस माल को यहां रखने में भी खासी परेशानी है। लकड़ी कारोबारी राजीव सिंगला कहते हैं कि मध्यप्रदेश की लकड़ी खासकर सागर की लकड़ी की राज्य में बड़ी डिमांड है, आर्डर के बावजूद भी माल एमपी के लकड़ी कारोबारी माल भेजने को तैयार नहीं हैं।

थोक मिक्सी कारोबारी एवं हरियाणा चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के पूर्व चेयरमैन राजेंद्र नाथ ने बताया कि एमपी में हरियाणा की मिक्सी की अच्छी मार्केट है, लेकिन इस वक्त कामकाज बहुत ज्यादा प्रभावित हो रहा है। हरियाणा के दवा कारोबारी जीडी छिब्बर कहते हैं कि एमपी में हर महीने करोड़ों की दवाएं हरियाणा से सप्लाई होती हैं, लेकिन इस वक्त माल भेजने का रिस्क नहीं लिया जा सकता।

पंजाब ने बंद की बुकिंग
इसी तरह आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के पूर्व प्रधान लुधियाना निवासी चरण सिंह लुहारा का कहना है कि पंजाब के उद्योगपति मध्यप्रदेश के आंदोलन से डरे हुए हैं। उन्होेंने दक्षिण भारत के लिए बुकिंग बंद कर दी है। पंजाब के जालंधर से स्पोर्ट्स गुड्स, लेदर, लुधियाना से गारमेंट्स, मशीनरी पार्ट्स और होजरी क ा सामान जाता है।
 
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