लाडवा-रादौर मार्ग पर स्थित माता बाला सुंदरी मंदिर पर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी चैत्र शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी से शुरू होकर बैसाख कृष्ण पक्ष की सप्तमी तक चलने वाला आठ दिवसीय विशाल मेला सोमवार से शुरू हो गया और पूरा मंदिर मां के जयकारों से गूंज उठा।
मेले का शुभारंभ रामेश्वर चहल ने मंदिर में दीप प्रज्वलित करके किया गया। इसके बाद उन्होंने माता के दरबार में माथा टेका। इस ऐतिहासिक मंदिर में माता की पवित्र पिंडी के दर्शनों को प्राथमिकता दी जाती है।
मंदिर में श्रद्धालुओं ने माता बाला सुंदरी की पिंडी के साथ-साथ माता बाला सुंदरी की भव्य प्रतिमा, शिव परिवार, हनुमान जी, भगवान नर सिंह, भगवान भैरो बली, महाकाली, ध्यानू भक्त, गणेश जी, माता दुर्गा की प्रतिमा के साथ-साथ प्रथम शैलपुत्री, द्वितीय ब्रह्मचारिणी, तृतीय चंद्रघंटा, चतुर्थ कुष्मांडा, पंचम स्कंद माता, षष्टम कात्यायनी, सप्तम काल रात्रि, अष्टम महागौरी, नवम सिद्धि दात्री के दर्शन भी किए और पूजा-अर्चना की।
मत्था टेकने आए श्रद्धालुओं के अनुसार मां के दरबार पर जो भी सच्चे दिल से मन्नत मांगता है, देवी माता उसकी इच्छा अवश्य पूरी करती है।
51 शक्ति पीठों में से एक शक्ति पीठ त्रिलोकपुर से लाकर यहां स्थापित किए जाने के कारण यह स्थान भी शक्ति पीठ के रूप में माना जाता है। मेले में वैसे तो हर प्रकार की मिठाइयों की दुकानें सजती हैं, लेकिन माता बाला सुंदरी मेले में खजला मिठाई लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनती है।
माता बाला सुंदरी मंदिर की महानता के कारण हर वर्ष मंदिर में श्रद्धालुओं ने अलग-अलग प्रकार के भंडारों का आयोजन किया जाता है। इस बार भी मंदिर परिसर में अनेक धार्मिक संस्थाओं और मां के भक्तों ने भंडारे लगाए।
भंडारों में हलवा-पूरी, छोले, कड़ी-चावल सहित तीले वाली कुल्फी, ब्रेड-पकौड़ा, फ्रूट, समोसे, खीर, बिस्कुट, लड्डू के भंडारे लगाए। रविवार शाम से ही भंडारों का आयोजन शुरू हो गया था।
मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी की व्यवस्था की गई थी। वहीं किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए मंदिर परिसर में न केवल फायर ब्रिगेड की गाड़ी मौजूद रही, बल्कि पुलिस का भी विशेष प्रबंध रहा।