चंडीगढ़। प्रशासक की सलाहकार परिषद की कला, संस्कृति, पर्यटन एवं विरासत संरक्षण संबंधी वैधानिक समिति के अध्यक्ष एचएस लक्की ने पर्यटन गतिविधियों पर हुए खर्च को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है। मंगलवार को उन्होंने कहा कि तीन वित्तीय वर्षों में पर्यटन संवर्धन के नाम पर कुल 33.26 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसमें से 11.84 करोड़ रुपये कलाकारों और अन्य विक्रेताओं को भुगतान के रूप में दिखाए गए हैं, लेकिन इन भुगतानों का कोई विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
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लक्की ने बताया कि शेष करीब 22 करोड़ रुपये के उपयोग को लेकर भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। उन्होंने सांसद मनीष तिवारी द्वारा संसद में उठाए गए सवाल का समर्थन करते हुए कहा कि इतने बड़े सार्वजनिक व्यय का पूरा विवरण सामने आना चाहिए।