डिपो फिर खोलने की तैयारी
केरोसिन सप्लाई बंद होने के बाद शहर के सात डिपो बंद कर दिए गए थे। अब प्रशासन इन्हें दोबारा शुरू करने की तैयारी कर रहा है। साथ ही पेट्रोल पंपों के जरिए भी केरोसिन उपलब्ध कराने की योजना है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 29 मार्च 2026 को अधिसूचना जारी कर नियमों में ढील दी है।
इसके तहत सरकारी तेल कंपनियों के पेट्रोल पंप अब 5,000 लीटर तक केरोसिन स्टोर कर सकेंगे। हर जिले में अधिकतम दो पेट्रोल पंपों को इसकी अनुमति दी गई है, जिससे वितरण व्यवस्था को तेजी मिल सके। जानकारी के अनुसार, पहले चंडीगढ़ को तीन महीने के लिए 276 किलोलीटर (2,76,000 लीटर) केरोसिन मिलता था जबकि एलपीजी के कम प्रसार के समय यह कोटा 1000 किलोलीटर (10,00,000 लीटर) तक था।
शहर में एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह बाधित नहीं है और लोगों को निर्धारित अंतराल पर गैस मिल रही है। साथ ही प्रशासन पीएनजी कनेक्शन बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है ताकि भविष्य में ऐसे संकट से बचा जा सके। -निशांत कुमार यादव, डीसी
गैस संकट में स्टोव की वापसी
गैस की किल्लत के बीच शहर में एक बार फिर स्टोव का दौर लौटता नजर आ रहा है। बढ़ती मांग के चलते बाजार में स्टोव की बिक्री में जबरदस्त उछाल आया है, वहीं इसकी कीमतें भी कई गुना तक बढ़ गई हैं। जो स्टोव पहले 300 से 500 रुपये में मिलते थे, अब वही 1500 से 2000 रुपये तक बेचे जा रहे हैं।
इंडस्ट्रियल एरिया, सेक्टर-20 और शहर की कॉलोनियों की दुकानों पर स्टोव की भारी मांग देखी जा रही है। दुकानदारों का कहना है कि गैस सिलिंडर की अनियमित सप्लाई के कारण लोग मजबूरी में स्टोव खरीद रहे हैं। खासकर रेहड़ी-फड़ी संचालक, छोटे ढाबा मालिक और बीपीएल परिवार इस विकल्प की ओर तेजी से बढ़े हैं। सेक्टर-20 में स्टोव खरीदने आए रिजवान ने बताया कि उनके भाई की रेहड़ी है और गैस न मिलने के कारण उन्हें स्टोव लेना पड़ा। वहीं, जुझार नगर में काम करने वाले राजू ने कहा कि कॉमर्शियल सिलिंडर नहीं मिलने से अब स्टोव ही सहारा है।
सेक्टर-20 के दुकानदार राकेश के अनुसार, स्टोव की सप्लाई पंजाब से हो रही है क्योंकि शहर में इसका चलन लगभग खत्म हो चुका था। अब हालात ऐसे हैं कि स्टोव आते ही तुरंत बिक जाते हैं। एक अन्य दुकानदार जगदीश ने बताया कि मांग इतनी ज्यादा है कि कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और स्टॉक टिक नहीं रहा। गौरतलब है कि केरोसिन, डीजल स्टोव और कोयले की भट्टियों का उपयोग भी बढ़ने लगा है। जानकारों का मानना है कि यदि गैस संकट जल्द नहीं सुलझा तो स्थिति खराब हो सकती है।