मौसम और देरी से आमद का असर
पिछले कुछ दिनों में हुई बारिश ने भी गेहूं खरीद को प्रभावित करने के संकेत दिए हैं। फसल में नमी बढ़ने के कारण मंडियों में गेहूं की आमद देरी से होने की संभावना है।
मोगा और जालंधर जैसे जिलों में अनुमान है कि 10 से 15 अप्रैल के बाद ही आमद तेज होगी। वहीं लुधियाना में विशेषज्ञों का मानना है कि वैसाखी के आसपास ही मंडियों में गेहूं पहुंचना शुरू होगा।
केंद्र तो बनाए लेकिन पानी-शौचालय तक की व्यवस्था नहीं
पठानकोट की मंडियों की स्थिति सबसे चिंताजनक बताई जा रही है। यहां दाना मंडी सहित कई मंडियों में मूलभूत सुविधाओं की कमी है। पीने का पानी, शौचालय और पक्के फर्श जैसी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे किसानों को परेशानी हो सकती है।
अमृतसर में भी कई मंडियों में तैयारियां अधूरी हैं। हालांकि प्रशासन ने 57 खरीद केंद्र स्थापित करने का दावा किया है और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही है लेकिन किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि समय पर व्यवस्थाएं पूरी नहीं हुईं तो किसानों को दिक्कत होगी। दूसरी ओर मोगा जिले में प्रशासन ने 121 मंडियों में सफाई और अन्य व्यवस्थाओं के लिए टेंडर पास कर दिए हैं। लुधियाना की खन्ना मंडी में भी पर्याप्त बारदाने और स्टोरेज की व्यवस्था होने का दावा किया गया है।
जालंधर में मंडी बोर्ड ने सभी तैयारियां पूरी होने का दावा किया है और किसानों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण सुविधा भी शुरू की जा रही है।
सरकार का दावा, लेकिन चुनौतियां बरकरार
खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री लालचंद कटारूचक्क ने कहा है कि गेहूं खरीद के लिए सभी इंतजाम पूरे हैं और एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने यह भी माना कि यदि उठान में देरी हुई तो समस्याएं खड़ी हो सकती हैं इसलिए केंद्र को इस संबंध में पत्र लिखा गया है।
कुल मिलाकर पंजाब में गेहूं खरीद सीजन इस बार तैयारियों और चुनौतियों के बीच शुरू हो रहा है। एक तरफ सरकार बड़े दावों के साथ मैदान में है तो दूसरी तरफ भंडारण संकट, आढ़तियों की हड़ताल, मौसम की मार और बारदाने की कमी जैसे मुद्दे पूरे सिस्टम की परीक्षा लेने को तैयार हैं।
यदि इन चुनौतियों का समय रहते समाधान नहीं हुआ तो किसानों को अपनी फसल बेचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है और राज्य की कृषि व्यवस्था पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।