चंडीगढ़। नगर निगम शहर में हैदराबाद की तर्ज पर लू कैफे बनाने जा रहा है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सेक्टर-9 और 22 के सार्वजनिक शौचालयों में जगह बनाने के लिए नगर निगम ने चीफ आर्किटेक्ट को प्रस्ताव भेजा है। सोमवार को चीफ आर्किटेक्ट के साथ निगम आयुक्त शौचालयों का निरीक्षण करेंगी। चीफ आर्किटेक्ट जहां तय करेंगे, वहां लू कैफे बनेंगे। अधिकारियों का मानना है कि इससे शौचालयों की सफाई व्यवस्था बेहतर रहेगी, वहीं दूसरी ओर निगम को आमदनी भी होगी। निगम इस योजना को प्राथमिकता के आधार पर शहर के पार्कों में लागू करवाना चाहती है।
आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने बताया कि दिल्ली में एक बैठक के दौरान हैदराबाद की ओर से यह प्रस्तुतीकरण दिया गया था। वहां शौचालयों के आसपास कैफे बनाए गए हैं। इसमें कॉपी, चाय और समोसे जैसे खाद्य पदार्थ मिलते हैं। इस कारण लोगों की आवाजाही ज्यादा रहती है और जिस व्यक्ति को जिम्मेदारी दी जाती है, वह भी शौचालयों को साफ करने के लिए बाध्य रहता है। असम और चेन्नई ने इस योजना को अपने यहां लागू किया है। चंडीगढ़ में नो प्रॉफिट एंड नो लॉस के आधार पर इस योजना को चलाने का प्रस्ताव है।
स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत शौचालयों की सफाई के काफी नंबर होते हैं। ऐसे में व्यवस्थित शौचालयों के लिए यह योजना काफी अच्छी है। कुछ सेक्टरों में यह योजना सफल रही तो आगे जिन शौचालयों में जगह होगी, वहां इसे लागू करेंगे। निगम का एक टॉयलेट ब्लॉक पर लगभग 40 से 50 हजार रुपये का खर्चा आता है। यह योजना सफल रही तो उनकी सफाई का खर्चा निगम को न करके वेंडर को ही करना होगा। वेंडर अपना व्यवसाय चलाने के लिए शौचालयों की सफाई पर बेहतर ध्यान देंगे।
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हटाया कचरा, निकली नारियल का निस्तारण करने वाली मशीन
निगम ने कचरा निस्तारण प्लांट में डंप कचरे को कटवाया था। इस दौरान कचरे से एक मशीन निकली, जिससे नारियल का निस्तारण किया जा सकता है। कचरे में दबी यह लाखों रुपये की मशीन निगम के लिए राजस्व का जरिया बन गई है। आयुक्त ने एक गाड़ी से पूरे शहर से नारियलों को इकट्ठा करके कचरा निस्तारण प्लांट में लाने की योजना बनाई। अब इन नारियलों के बंडल बनाकर बाजार में बेचने की तैयारी है। इससे निगम को अच्छा खासा राजस्व आएगा।
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एसडब्ल्यूएम की टूल किट फाइनल करने वाली कमेटी की सदस्य बनीं आयुक्त
शहरी एवं आवास विकास मंत्रालय की ओर से स्वच्छ भारत मिशन की टूल किट को अंतिम रूप देने के लिए केंद्र स्तर पर एक कमेटी बनाई जाती है। इस कमेटी में देशभर से चुनिंदा अधिकारियों को शामिल किया जाता है। इसमें आयुक्त आंनिदिता मित्रा और इंदौर के आयुक्त को नाम के साथ रखा गया है। इसके अलावा केंद्र के अन्य अधिकारियों को कमेटी में रखा गया है।