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इनेलो ने चुनाव मैदान में उतारे हैं ये 10 सूरमा

Sat, 15 Mar 2014 01:41 PM IST
टीम डिजीटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा में इनेलो ने लोकसभा सीटों पर पंजाबी, सैनी, यादव समुदायों से एक-एक प्रत्याशी को टिकट दिया है वहीं सिख और मुसलिम वर्ग से संबंधित एक-एक उम्मीदवार को मैदान में उतारा है।
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जारी सूची में पार्टी ने राज्य में जाट समुदाय को तीन और अनुसूचित जाति को दो टिकट दिए हैं। पार्टी की ओर से घोषित उम्मीदवारों का ये है परिचय-

जसविंदर संधू : करनाल लोकसभा सीट

इनेलो के प्रदेश उपाध्यक्ष और प्रदेश के पूर्व कृषि मंत्री 58 वर्षीय जट सिख व अकाली नेता रहे जसविंदर संधू गांव गुमथला गढू के तीन बार सरपंच रहने के बाद इलाके में तीन बार विधायक रह चुके हैं।

मुख्य संसदीय सचिव पद के अलावा वे पांच साल तक कृषि मंत्री भी रहे। वे पांच साल से करनाल संसदीय सीट के प्रभारी हैं।

दुष्यंत चौटाला : हिसार लोकसभा सीट

भारतीय टेबल टेनिस फेडरेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष 26 वर्षीय दुष्यंत सिंह चौटाला इनेलो के प्रधान महासचिव डॉ. अजय सिंह चौटाला के बड़े बेटे हैं।

कैलीफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी में बैचलर ऑफ साइंस इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन के डिग्री धारक दुष्यंत बीते सवा साल के दौरान उन्होंने युवा इनेलो की गतिविधियों को बढ़ावा देने और पार्टी की नीतियां सोशल मीडिया के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

राव बहादुर सिंह : भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट

यादव समुदाय के 58 वर्षीय राव बहादुर सिंह इस समय नांगल चौधरी विधायक और इनेलो के जिला महेंद्रगढ़ (नारनौल) के जिलाध्यक्ष हैं। उन्होंने नांगलचौधरी से कांग्रेस प्रत्याशी राधेश्याम को करीब 12 हजार मतों से हराया था।

उनका विधानसभा क्षेत्र भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत पड़ता है और वे कई सालों से इस क्षेत्र में शिक्षा का विस्तार करने में सक्रिय हैं और उन्होंने अनेक स्कूल, कॉलेज व शिक्षण संस्थान खुलवाए। वे यादव सभा महेंद्रगढ़ के अध्यक्ष और यदुवंशी शिक्षण संस्थानों समूह के चेयरमैन भी हैं।

जाकिर हुसैन : गुड़गांव सीट

लॉ ग्रेजुएट 51 वर्षीय पूर्व विधायक जाकिर हुसैन मेवात इलाके के नेता हैं। उनके पिता तैय्यब हुसैन पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में मंत्री रहे हैं। जाकिर हुसैन 1991 और 2000 में विधायक रह चुके हैं। वे दो बार संसदीय चुनाव मामूली अंतर से हारे।

इस बार बसपा ने उन्हें गुड़गांव से प्रत्याशी बनाया था मगर वे इनेलो में शामिल हो गए। वे अनेक शिक्षण संस्थानों के चेयरमैन हैं और आल इंडिया मेवाती पंचायत और मेवात एजुकेशन बोर्ड के भी अध्यक्ष हैं।

बलबीर सैनी : कुरुक्षेत्र

63 वर्षीय बलबीर सिंह सैनी 1987 में पेहोवा से विधायक बने थे और बाद में मंत्री भी। वे 1977 में सरपंच बने और बाद में पंचायत समिति सदस्य। पिछले चार विधानसभा चुनाव में दूसरे स्थान पर रह जाते हैं।

उन्होंने 1987 में कांग्रेस के दिग्गज नेता तारा सिंह को हराया था। वे काफी समय से इनेलो में विभिन्न जिलों व हलका प्रभारी के तौर पर निरंतर काम कर रहे हैं।

चरणजीत सिंह : सिरसा

कालांवाली के विधायक 45 वर्षीय चरणजीत सिंह दलित परिवार से संबंधित हैं। उन्होंने अपना राजनीतिक जीवन 2000 में रोड़ी गांव के सरपंच पद से शुरू किया था।

2009 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी सुशील इंदौरा को करीब 13 हजार वोटों के अंतर से पराजित किया था। चरणजीत सिंह 15 साल से सिरसा संसदीय क्षेत्र में ही सक्रिय हैं और इसी क्षेत्र के रहने वाले हैं।

डॉ. कुसुम बाला शेरवाल : अंबाला

अनुसूचित जाति से 44 वर्षीय कुसुम बाला शेरवाल एमए, पीएचडी हैं। इनेलो की गतिविधियों में निरंतर सक्रिय रही हैं। वे इनेलो के प्रदेश महासचिव और प्रवक्ता अशोक शेरवाल की पत्नी हैं।

शेरवाल ने 2000 में अंबाला से बसपा टिकट पर चुनाव लड़ा था मगर तीसरे नंबर पर रहे थे। शेरवाल बहुजन समाज पार्टी की हरियाणा इकाई के प्रदेशाध्यक्ष थे और उन्होंने 1996 में मुलाना से चुनाव लड़ा था। पिछले 12 वर्षों से शेरवाल दंपति इनेलो के प्रमुख नेताओं में से हैं।

पदम दहिया : सोनीपत

51 वर्षीय  पूर्व विधायक पदम दहिया इनेलो के राष्ट्रीय सचिव हैं। बीए, बीएड पास पदम दहिया 2000 से 2005 तक सोनीपत संसदीय क्षेत्र की रोहट सीट से विधायक रह चुके हैं।

वे युवा इनेलो जिला सोनीपत के बारह साल तक अध्यक्ष रहे और पार्टी की मुख्य इकाई के सात सालों तक जिलाध्यक्ष भी रहे।

शमशेर सिंह खरकड़ा : रोहतक

57 वर्षीय शमशेर सिंह खरकड़ा ने खरकड़ा गांव के सरपंच पद से राजनीतिक जीवन की शुरूआत की। वे रोहतक सहकारी बैंक के निदेशक रहे हैं। 1974 से 1996 तक वे चौधरी देवीलाल और ओमप्रकाश चौटाला के नेतृत्व में पार्टी के प्रमुख पदों पर रहे हैं।

1996 में राजनीति से किनारा किया मगर 2009 के विधानसभा चुनाव में महम चौबीसी पंचायती उम्मीदवार के तौर पर महम से निर्दलीय चुनाव लड़ा था और उन्होंने आनंद सिंह डांगी को न सिर्फ भारी टक्कर दी बल्कि वे 37 हजार वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे। कुछ समय पहले इनेलो में लौटे हैं।
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आरके आनंद : फरीदाबाद

71 वर्षीय आरके आनंद पंजाबी नेता और वरिष्ठ एडवोकेट हैं। वे राज्यसभा सदस्य रहे हैं। दिल्ली बार काउंसिल के अध्यक्ष पद के अलावा भारतीय ओलंपिक संघ में उपाध्यक्ष पद पर भी वे रहे।

उनका संबंध फरीदाबाद क्षेत्र से है। लंबे अरसे से फरीदाबाद और दिल्ली में ही सक्रिय सामाजिक नेता व कार्यकर्ता रहे हैं।
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