गुटबाजी से जूझ रही आम आदमी पार्टी में पूर्व सूबा कन्वीनर सुच्चा सिंह छोटेपुर को वापस लाने पर मंथन शुरू हो गया है। मौजूदा हालात में पार्टी का एक वर्ग छोटेपुर को वापस लाने के हक में है। बगावत करने वाले सुखपाल खैरा की बढ़ती लोकप्रियता अब पार्टी केलिए चिंता का सबब बनने लगी है। खैरा गुट की जिलास्तरीय कन्वेंशन में भीड़ दिनों दिन बढ़ती जा रही है। वहीं, आप की पंजाब इकाई में नेतृत्व का अभाव है। सांसद भगवंत मान साफ कह चुके हैं कि वह प्रधान पद नहीं लेंगे। उनके बाद इस कद का कोई भी नेता नहीं है। पार्टी ने डॉ. बलबीर सिंह को सह-प्रधान बनाया था, लेकिन वह कोई करिश्मा नहीं कर सके। इसके बाद पार्टी नेताओं को छोटेपुर की याद आई है।
सूत्रों के मुताबिक रविवार को नई दिल्ली में पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के साथ पंजाब के नेताओं की बैठक में भी यह मुद्दा उठा था। पंजाब के नेताओं ने केजरीवाल से कहा कि छोटेपुर को वापस लाया जाना चाहिए। केजरीवाल ने सिर्फ देखते हैं.. कह कर बात टाल दी। छोटेपुर पार्टी वॉलंटियर्स में काफी लोकप्रिय थे। एक सीनियर नेता होने के साथ माझा में उनका प्रभाव था। लेकिन अलग पार्टी बनाने के बाद वह वॉलंटियर्स अपने साथ नहीं ले जा सके। क्योंकि तब केजरीवाल का ही करिश्मा चल रहा था। पर अभी भी आम वॉलंटियर्स के मन में छोटेपुर के प्रति सहानुभूति है। जो लोग छोटेपुर को लाना चाहते हैं, उन्हें उम्मीद है कि इससे खैरा के साथ जा रहे वॉलंटियर्स को रोकने में मदद मिलेगी।
खैरा के साथ गए छोटेपुर, तो होगा नुकसान
आप के अंदर इस बात पर भी मंथन चल रहा है कि अगर सुच्चा सिंह छोटेपुर, बागी सुखपाल खैरा गुट के साथ चले जाते हैं तो पार्टी को और ज्यादा नुकसान होगा। डॉ. धरमवीर गांधी पहले ही खैरा की मांगों की हिमायत कर चुके हैं। जिससे खैरा गुट को और मजबूत हुआ है। अगर छोटेपुर भी चले जाते हैं तो बागी और मजबूत होंगे। इसलिए किसी भी तरह उन्हें रोका जाए।
पैसे लेने के आरोपों पर हटाया था
आप नेतृत्व ने बीच चुनाव में सुच्चा सिंह छोटेपुर को सूबा कन्वीनर पद से हटा दिया था। उन पर वॉलंटियर्स से पैसे लेने का आरोप लगाया गया था। हालांकि पार्टी कभी इस बारे में कोई सबूत नहीं दिखा सकी थी। उन्हें हटा कर गुरप्रीत घुग्गी को प्रधान बना दिया गया था। छोटेपुर ने अपने समर्थकों को साथ लेकर आपणा पंजाब पार्टी बना कर विधानसभा चुनाव लड़ा था।