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जालंधर में शिअद-कांग्रेस में है दिलचस्प टक्कर

Wed, 09 Apr 2014 03:06 PM IST
सुरिंदर पाल/अमर उजाला, जालंधर
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जालंधर लोकसभा सीट पर इस बार दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा। शिअद जहां आज तक एक बार ही जालंधर में जीत पाया है और दूसरी बार जीतकर शहरी वर्ग में अपनी उपस्थिति को दर्ज करवाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहा है वहीं कांग्रेस के नेता चौधरी संतोख सिंह अपने खानदान की सियासत और वर्चस्व को कायम रखने के लिए मैदान में हैं।
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चौधरी खानदान की सियासत दांव पर लगी है और वहीं शिअद के पवन कुमार टीनू जालंधर लोकसभा जीतकर दिल्ली जाने के लिए पूरा दमखम लगा रहे हैं। जालंधर में रविदासिया वोट बैंक पर तमाम राजनीतिक पार्टियों की नजर है।

बसपा के उम्मीदवार सुखविंदर कोटली रविदासिया बिरादरी की वोट को बांटकर दोनों प्रत्याशियों के लिए सिरदर्द पैदा कर सकते हैं। कोटली का रविदासिया बिरादरी में जमीनी स्तर पर काफी आधार है।
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चौधरी संतोख सिंह

चौधरी संतोख सिंह पंजाब के पूर्व निकायमंत्री चौधरी जगजीत सिंह के छोटे भाई हैं और पंजाब युवा कांग्रेस के प्रधान विक्रम चौधरी के पिता है।

युवा कांग्रेस के प्रधान चौधरी विक्रम जालंधर लोकसभा सीट से टिकट मांग रहे थे लेकिन कांग्रेस हाईकमान ने उनके पिता चौधरी संतोख सिंह को मैदान में उतारकर नया दांव खेल दिया है।

चौधरी संतोख सिंह दो बार विधायक रह चुके हैं और 2012 के विधानसभा चुनावों में वह फिल्लौर में त्रिकोणीय मुकाबले में चंद वोटों से शिअद प्रत्याशी से हारे थे।

अविनाश क्लेर को 32.58 फीसदी मत मिले थे, जबकि चौधरी संतोख सिंह को 32.55 फीसदी वोट मिले थे। इसी सीट पर बसपा के खैहरा को 30 फीसदी मत मिले थे, जो चौ. संतोख सिंह की हार का कारण बने थे।

शिअद नेता पवन टीनू

शिअद के नेता पवन कुमार टीनू रविदासिया दलित समाज से हैं। उनकी पार्टी में एंट्री ही 2007 के बाद हुई है। हालांकि वह 2009 में भी लोकसभा सीट से दावेदार थे लेकिन शिअद प्रमुख ने ऐन मौके पर टिकट सूफी गायक हंसराज हंस को दे दी, जो चुनाव हार गए। टीनू मौजूदा सरकार में सीपीएस हैं और वह जमीनी स्तर पर सरपंच से उठकर विधायक व सीपीएस की कुर्सी तक पहुंचे हैं।

टीनू दलित वर्ग में खासी पैठ रखते हैं। टीनू इससे पहले बसपा की टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। टीनू ने बसपा से नाराज होकर बहुजन क्रांति पार्टी का गठन किया था, 2007 के बाद इस पार्टी का विलय शिरोमणि अकाली दल में कर दिया गया।

टीनू को पिछली जाति विकास का चेयरमैन बनाया गया और उन्होंने आदमपुर विधानसभा हलके में डटकर मेहनत की। 2012 में शिअद की तरफ से उनको आदमपुर से विधायक की टिकट दी गई, जिसमें वह जीत गए।
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बसपा नेता सुखविंदर कोटली

बसपा नेता सुखविंदर कोटली कांग्रेस और शिअद के बीच टक्कर में अहम भूमिका निभा रहे हैं। कोटली को मिलने वाला वोट कांग्रेस का नुकसान करेगा या शिअद का, इसको लेकर सियासी पंडित गणित लगा रहे हैं।

सुखविंदर कई सालों तक कोटली थान सिंह गांव के सरपंच रहे हैं। बसपा ने उनको 2012 में पवन कुमार टीनू के मुकाबले ही आदमपुर में उतारा था, जहां पर उनको 26 हजार मत पड़े थे और यह मत कांग्रेस की हार का कारण बन गए थे।

कोटली इस बार लोकसभा के लिए जालंधर में मैदान से हैं। वह दलित समाज के मिशनरी नेता हैं और रविदासिया समाज के कई संतों का उन पर आशीर्वाद है।
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