चंडीगढ़ में इस बार युवाओं की अपेक्षा रिटायर्ड लोगों की स्थिति मजबूत होती दिख रही है। ऐसे में 2019 में शहर का सांसद कौन होगा, इसका फैसला सीनियर सिटीजन ही करेंगे। 2014 के आंकड़ों पर गौर करें तो इस साल लोकसभा चुनाव में सीनियर सिटीजन मतदाताओं की संख्या लगभग 36 प्रतिशत बढ़ी है। 2014 की बात करें तो उस समय 60 साल की उम्र से अधिक मतदाताओं की संख्या 61,868 रही है, जबकि इस बार सीनियर सिटीजन की संख्या 83,952 है।
वहीं पहली बार 18 से 19 के बीच के मतदाताओं की संख्या कम दिखी है। चंडीगढ़ चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले चुनाव के बाद से उनकी संख्या में 33 प्रतिशत की कमी देखी गई है। नए मतदाताओं के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2014 में 18,170 के अनुपात में इस बार 12,094 युवा मतदाता निकले हैं जिनकी आयु 18 से 19 के बीच है।
ऐसे बढ़े वोटर
मुख्य निर्वाचन कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल मतदान करने वाले 6.19 लाख लोगों में से लगभग 83,000 वरिष्ठ नागरिक हैं। वहीं 2014 में 5.8 लाख मतदाताओं में से 61,000 वरिष्ठ नागरिक शामिल थे। बीते पांच वर्षों में चंडीगढ़ में मतदाताओं की संख्या में केवल 39,000 की वृद्धि हुई है। 60 से अधिक आयु वर्ग में 22,000 से अधिक का अंतर देखा जा रहा है।
छात्रों को बनाया जा रहा वोटर
जानकारों की मानें तो पंजाब और हरियाणा पड़ोसी राज्य होने के चलते वहां से ज्यादातर युवा यहां आते हैं। लेकिन उनके वोट नहीं होने के चलते युवा वर्ग की वोटों में गिरावट आई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी अजोय कुमार सिन्हा ने कहा कि अन्य राज्यों से आए छात्र यहां मतदान नहीं कर सकते। कई छात्र वापस चले जाते हैं। हमने इस साल कई विशेष शिविर आयोजित किए हैं, ताकि इन युवाओं को सुविधा हो और वे अपना वोट यहां डाल सकें।