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लोकसभा चुनाव 2019 का रण जीतने के लिए हरियाणा में धुरंधरों में घमासान, कांटे का है मुकाबला

Mon, 06 May 2019 01:22 PM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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फाइल फोटो
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हरियाणा के कुरुक्षेत्र का रण भाजपा ने 37 साल बाद 2014 में पहली बार फतह किया था। 1977 में इस सीट के अस्तित्व में आने के बाद भाजपा ने यहां जीत का स्वाद चखा। हालांकि, उसका अनुभव यहां से सांसद राजकुमार सैनी के साथ अच्छा नहीं रहा। सैनी 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान ही पार्टी से बागी हो गए थे। अब सैनी अपनी अलग पार्टी बनाकर चुनाव मैदान में हैं। भाजपा चाहती है कि इस बार भी कुरु के क्षेत्र में कमल ही खिले, इसलिए पूरी ताकत पार्टी ने झोंकी हुई है तो विरोधी दल उनकी राह रोकने के लिए कड़ी चुनौती दे रहे हैं।
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कांग्रेस ने जाट चेहरे निर्मल सिंह पर दांव खेला है, तो इनेलो ने अभय चौटाला के बेटे अर्जुन चौटाला को दंगल में उतारा है। जजपा से जयभगवान शर्मा उर्फ डीडी चेहरा हैं। डीडी ही ऐसे प्रत्याशी हैं जो लोकसभा क्षेत्र के स्थायी निवासी हैं, बाकि तीनों दलों के उम्मीदवार दूसरे संसदीय क्षेत्रों से हैं। डीडी ने यहां धरतीपुत्र का नारा दिया हुआ है तो भाजपा पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम मनोहर लाल के भरोसे है। भाजपा ने राज्य मंत्री नायब सैनी पर को उतारा है। सैनी संघ प्रचारक रहे हैं और सीएम मनोहर लाल के पुराने परिचित हैं।

मनोहर लाल से मुलाकात सैनी के राजनीतिक जीवन का टर्निंग प्वाइंट मानी जाती है। इसके बाद वह आगे ही बढ़ते गए। सैनी को संसद पहुंचाने के लिए सीएम मनोहर लाल खुद उनके सारथी बने हुए हैं। पीएम नरेंद्र मोदी भी 8 मई को कुरुक्षेत्र में आ रहे हैं, इसके बाद भाजपा अपने पक्ष में पूरा माहौल बनाने की कोशिश करेगी। कुरुक्षेत्र जाट बहुल सीट हैं, ऐसे में निर्मल सिंह जाट व जट सिखों के सहारे मजबूत टक्कर दे रहे हैं। रणदीप सुरजेवाला व पूर्व सांसद नवीन जिंदल के साथ आने से उन्हें और ताकत मिली है।
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अर्जुन चौटाला के चुनाव की कमान पिता अभय चौटाला संभाले हुए हैं तो इनेलो प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा भी जीतोड़ मेहनत कर रहे हैं। इनेलो भी जाट व जट सिखों पर फोकस कर रही है। चारों ही उम्मीदवारों में कुरुक्षेत्र का रण जीतने को लेकर कांटे की टक्कर है।

चरम पर जाट-गैर जाट की लड़ाई

संसदीय क्षेत्र में जाट और गैर जाट की लड़ाई हावी है। ब्राह्मण व वैश्य मतदाता यहां जीत में अहम रोल अदा करेंगे। दोनों ही समुदायों के मतदाताओं की तादाता अच्छी खासी है। जाट आंदोलन का असर रिश्तों पर भी पड़ा है। जाट, सैनी को देखकर राजी नहीं तो सैनी, जाट को।

कुरुक्षेत्र-कैथल दोनों ही महाभारतकालीन शहर
हरियाणा के उत्तर में स्थित कुरुक्षेत्र जिला अंबाला, यमुनानगर, करनाल और कैथल से घिरा हुआ है। श्रीकृष्ण ने गीता का संदेश अर्जुन को यहीं दिया। कैथल भी महाभारत कालीन ऐतिहासिक शहर है। इसकी सीमाएं करनाल, कुरुक्षेत्र, जींद और पंजाब के पटियाला जिले से सटी हुई हैं। पुराणों के अनुसार इसकी स्थापना युधिष्ठिर ने की थी। इसे वानर राज हनुमान का जन्म स्थान भी माना जाता है। कुरुक्षेत्र और कैथल दोनों जिलों को मिलाकर ही कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट बनी है। 1971 तक कैथल अलग सीट थी, जबकि कुरुक्षेत्र सीट का अस्तित्व नहीं था। 1977 में कुरुक्षेत्र नई सीट गठित की गई।

हुड्डा के करीबी निर्मल को भितरघात का खतरा
अंबाला के नग्गल से विधायक व मंत्री रह चुके निर्मल सिंह पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के करीबी हैं। टिकट दिलाने में हुड्डा की अहम भूमिका रही है। ऐसे में हुड्डा विरोधी खेमा निर्मल की संसद पुहंचने की राह में कांटे बिछा सकता है। संसदीय क्षेत्र के जाट नेता नहीं चाहेंगे कि निर्मल सिंह को कुरुक्षेत्र में जीत रूपी संजीवनी मिले। चूंकि, अंबाला शहर में वह बीते कई चुनावों से अनिल विज से हारते आ रहे हैं।

तीसरे स्थान पर लुढ़क गए दो बार के सांसद जिंदल

भाजपा उम्मीदवार राजकुमार सैनी ने 2014 में कांग्रेस के लगातार दो बार सांसद उद्योगपति नवीन जिंदल को भारी मतों से हराया था। सैनी को करीब 37 फीसदी वोट के साथ 4,18,112 मत मिले थे, जबकि इनेलो के बलबीर सैनी को 25 फीसदी वोट के साथ कुल 2,88,376 तो जिंदल को 2,87,722 वोट से ही संतोष करना पड़ा था। जिंदल तीसरे नंबर पर लुढ़क गए थे।

संसदीय क्षेत्र में भाजपा का वर्चस्व
लोकसभा क्षेत्र कुरुक्षेत्र में 9 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इनमें से लाडवा, शाहाबाद, थानेसर, रादौर, गुहला में भाजपा विधायक हैं। कलायत में आजाद विधायक हैं तो कैथल में कांग्रेस, पुंडरी में भी निर्दलीय विधायक हैं। पिहोवा से इनेलो विधायक थे, जिनकी मृत्यु हो चुकी है। भाजपा इस सीट को अपने विधायकों के बूते जीतने के लिए भी पूरा जोर लगा रही है।

साढ़े सोलह लाख से अधिक मतदाता चुनेंगे सांसद
कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र में 16 लाख 57 हजार 335 मतदाता हैं, जिनमें 8 लाख 82 हजार 798 पुरुष, 7 लाख 74 हजार 525 महिला और 12 ट्रांसजेडर मतदाता शामिल हैं।

भाकियू, किसानों की भूमिका रहेगी आम
कुरुक्षेत्र सीट के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में 90 प्रतिशत लोग कृषि पर ही निर्भर हैं। यहां लगे उद्योग भी कृषि आधारित ही हैं। कुरुक्षेत्र को किसान आंदोलनों की भूमि भी कहा जाता है। सत्तारूढ़ भाजपा से किसान ज्यादा खुश नहीं हैं। भारतीय किसान यूनियन हरियाणा से जुड़े किसानों की चाल टेड़ी है जो भाजपा प्रत्याशी का गणित बिगाड़ सकती है।
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सोनीपत लोकसभा सीट

वोटर -15 लाख 82 हजार 658
महिलाएं - 8 लाख 56 हजार 907
पुरुष - 7 लाख 25 हजार 742
युवा - लगभग 4 लाख

जातिगत
जाट - 5 लाख 20 हजार
ब्राह्मण -1 लाख 90 हजार
रविदास -1 लाख 40 हजार
पंजाबी - 1 लाख 10 हजार
वाल्मीकि - 80 हजार
महाजन - 80 हजार
धानक - 60 हजार
सैनी - 60 हजार
कश्यप - 50 हजार
राजपूत - 40 हजार
अन्य - लगभग ढाई लाख
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