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#VoteKaro: पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में उच्च शिक्षित उम्मीदवारों में होगा लोकसभा चुनाव का 'दंगल'

Thu, 18 Apr 2019 04:00 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरबंस कौर दूलो
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पंजाब की चर्चित लोकसभा सीट फतेहगढ़ साहिब में चुनावी मैदान पूरी तरह से सज गया है और यहां से उम्मीदवारों की संख्या नौ हो गई है। इस संसदीय सीट से अकाली दल कांग्रेस, पंजाब डेमोक्रेटिक अलायंस और आप के उम्मीदवार घोषित हो चुके हैं। कांग्रेस ने पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. अमर सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है।
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अकाली दल ने पूर्व आईएएस व सीएम के प्रिंसिपल सचिव रहे दरबारा सिंह गुरु को उम्मीदवार बनाया है। आम आदमी पार्टी ने पंजाब एससी विंग सचिव बलजिंदर सिंह चौंदा को मैदान में उतारा था, लेकिन 21 दिन बाद चौंदा की टिकट काटकर पूर्व मुख्य संसदीय सचिव व राज्यसभा सदस्य शमशेर सिंह दूलो की पत्नी हरबंस कौर दूलो को दे दिया गया है। दूलो पंजाबी में एमए हैं।

पंजाब डेमोक्रेटिक अलांयस ने हरियाणा चिल्लड़ कांड के लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे मनविंदर सिंह ग्यासपुरा को चुनाव मैदान में उतारा है। मनविंदर सिंह ग्यासपुरा इंजीनियर हैं, जो हरियाणा के चिल्लड़ कांड को उजागर कर इसमें मारे गए निर्दोष सिखों को इंसाफ दिलाने में अहम भूमिका अदा कर रहे हैं।
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राष्ट्रीय जन शक्ति पार्टी (सैकुलर) से जगदीप सिंह सिरथला, राष्ट्रीय स्वराज पार्टी से अशोक कुमार और राष्ट्रीय सर्वजन सेवा पार्टी से गुरजीत सिंह, जय जवान जय किसान पार्टी से बलविंदर कौर और भारतीय लोग सेवा दल से सुरजीत सिंह कंग चुनाव मैदान में हैं।

15 साल से अकाली दल की झोली खाली

2004 के लोकसभा चुनाव में अकाली दल से सुखदेव सिंह लिबड़ा सांसद बने थे। उसके बाद अकाली दल का सांसद नहीं बन पाया। सुखदेव सिंह लिबड़ा 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सांसद भी रहे हैं। क्योंकि परमाणु समझौते में डॉ. मनमोहन सिंह के हक में डाली वोट के बाद सांसद लिबड़ा कांग्रेस में चले गए थे और फिर जीत गए थे। अकाली दल ने इस बार सीएम के पूर्व प्रिंसिपल सचिव रहे दरबारा सिंह गुरु को यहां से उम्मीदवार उतारा है। दरबारा सिंह गुरु 2017 के विधानसभा चुनाव में बस्सी पठाना से हार गए थे।

कांग्रेस के लिए कठिन परिश्रम
2009 के बाद कांग्रेस भी अपना सांसद इस हलके में नहीं बना पाई। कांग्रेस ने मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी डॉ. अमर सिंह निवासी रायकोट को यहां से उम्मीदवार बनाया है। संसदीय क्षेत्र के नौ हल्कों में से सात पर कांग्रेस काबिज है। डॉ. सिंह के लिए सांसद बनने की राह इतनी भी आसान नहीं होगी। क्योंकि फतेहगढ़ साहिब के लोग हर पांच साल बाद नई पार्टी को अजमाते हैं।

पीडीए के मनविंदर सिंह का पहला परिश्रम
पंजाब डेमोक्रेटिक अलांयस ने मनविंदर सिंह ग्यासपुरा को अपना उम्मीदवार बनाया है। ग्यासपुरा लुधियाना के हैं और मल्टीनेशनल कंपनी में इंजीनियर की नौकरी छोड़कर आए हैं। हरियाणा के चिल्लड़ कांड के लोगों को इंसाफ दिलाने की लड़ाई लड़ने वाले ग्यासपुरा लोक इंसाफ पार्टी पंजाब (बैंस ब्रदर) के हिस्से आई सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनकी चुनावी सभाओं में अकसर दोनों बैंस बंधु खुद प्रचार करते नजर आते हैं।

 
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आप के टूटे वोट बैंक को जुटाएंगी हरबंस कौर दूलो

2014 के लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के सांसद हरिंदर सिंह खालसा को संसदीय क्षेत्र के लोगों ने तीसरे विकल्प के तौर पर देखा था और अकाली-कांग्रेस रवायती पार्टियों से किनारा करके केजरीवाल की पार्टी के सांसद को चुना। सांसद खालसा मौजूदा कैबिनेट मंत्री साधू सिंह धर्मसोत से 52 हजार से अधिक वोटों से जीते थे, पर खालसा लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सके।

इस बार पार्टी ने खन्ना की विधायक व 2002 से 2007 तक कांग्रेस सरकार में मुख्य संसदीय सचिव रही हरबंस कौर दूलो को उम्मीदवार बनाया है। वह खन्ना विधानसभा क्षेत्र की निवासी हैं। दूलो ने बस्सी पठाना में 2012 में अकाली दल के खिलाफ चुनाव लड़ा, पर वह जस्टिस निर्मल सिंह से हार गई थी। हरबंस कौर सांसद खालसा की ओर से बिखेरे गए पार्टी के वोट बैंक को जुटाने में लगी हैं।

ऐसे में आप के लिए यह चुनाव बेहद कड़ी परीक्षा होगा। ऐसा माना जा रहा है कि बस्सी पठाना, खन्ना, समराला, पायल व साहनेवाल में उनका बड़ा वोट बैंक है।
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