प्रियंका ने कहा कि जब केंद्र और हरियाणा में भाजपा की सरकार बनी थी तो यहां के लोगों को बहुत उम्मीदें थीं। दो करोड़ रोजगार के वादे किए गए थे, लेकिन पांच साल में पांच करोड़ रोजगार खत्म हो गए। इसमें से पांच लाख तो सिर्फ नोटबंदी में खत्म हो गए।
आज देश के सामने किसान, युवाओं को रोजगार, महिलाओं की सुरक्षा की चुनौती है। कांग्रेस सच्चाई और लोगों के मुद्दों पर लड़ाई लड़ रही है, लेकिन बीजेपी के बड़े-बड़े नेता देश-विदेश घूमते हैं और कभी गांव नहीं जाते हैं। इन्होंने महिलाओं और किसानों से कभी नहीं पूछा कि आपकी समस्याओं को लेकर क्या कर सकते हैं।
गरीबों को सालाना 72 हजार देंगे
राहुल गांधी ने घोषणापत्र बनाने के लिए पार्टी के नेताओं को पूरे देश में भेजा है। इस घोषणापत्र में न्याय का जिक्र है, जिसके तहत गरीबों को सालाना 72 हजार दिया जाएगा। बीजेपी सरकार ने वादा किया था कि सभी के खाते में 15-15 लाख रुपये डाले जाएंगे, पर किसी को नहीं मिला।
10 हजार करोड़ रुपया उद्योगपतियों को दे दिया। चुनाव के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यहां तक कह डाला कि यह तो जुमला था। बीजेपी सरकार में 24 लाख रोजगार खाली पड़े हैं। कांग्रेस का वादा है कि सरकार बनने के बाद एक साल के भीतर इन पदों को भर दिया जाएगा।
प्रियंका ने कहा कि बीजेपी सरकार ने मनरेगा योजना को कमजोर कर दिया। आज गांवों में जेसीबी से कार्य हो रहे हैं, जिसके चलते रोजगार खत्म हो गया। नोटबंदी के समय कहा गया था कि कालाधन वापस आएगा, लेकिन एक भी रुपया वापस नहीं आया। गरीब आदमी लाइन में लग गए, लेकिन कोई अमीर लाइन में नहीं लगा।
जनता के नहीं, शहीदों के नाम पर मांगते हैं वोट
प्रियंका ने कहा कि बीजेपी सरकार ने किसानों की दोगुनी आय का वादा किया था, लेकिन इन पांच सालों में 12 हजार किसानों ने समय से बीज व खाद नहीं मिलने पर आत्महत्या कर ली। जब हरियाणा समेत कई राज्यों के किसान दिल्ली पहुंचे तो प्रधानमंत्री ने उनकी बात तक नहीं सुनी। अब वे किसानों के मुद्दों को छोड़कर शहीदों के नाम पर वोट मांग रहे हैं। जनता के मुद्दों को नहीं उठा रहे हैं।