फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लोकसभा चुनाव 2019: हरियाणा में आचार संहिता लागू होते ही जारी किए गए 10 निर्देश, सख्ती से हो पालन

Mon, 11 Mar 2019 03:53 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
निर्वाचन अधिकारी राजीव रंजन
विज्ञापन
लोकसभा चुनाव 2019 की तारीखों के एलान के साथ ही हरियाणा में आचार संहिता लागू हो गई। वहीं राज्य निर्वाचन आयोग ने इसके सख्ती से पालन करने का आदेश देते हुए कुछ दिशा निर्देश जारी किए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजीव रंजन ने प्रेस कांफ्रेंस करके सभी जानकारियां दी।
विज्ञापन


निर्देशों के तहत, हरियाणा में लोकसभा चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को अपने विदेशी बैंक खाते या देनदारी की जानकारी नामांकन पत्र के साथ फार्म-26 में देनी होगी। 2019 के संसदीय चुनाव के लिए चुनाव आयोग ने इस बार यह बड़ा बदलाव किया है।

इसके साथ ही पांच साल की आयकर रिटर्न भी उम्मीदवार को नामांकन पत्र के साथ देनी होगी। अगर उम्मीदवार ऐसा नहीं करता, तो उसका नामांकन नामंजूर कर दिया जाएगा। अभी तक एक साल की आयकर रिटर्न देने का ही प्रावधान था। इस बार विदेशी खातों की जानकारी व देनदारी का ब्योरा भी पहली बार मांगा गया है।
विज्ञापन

सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी भी देनी होगी

इस बार उम्मीदवार को अपने साथ-साथ पूरे परिवार के सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी भी देनी होगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजीव रंजन ने बताया कि ईपीआईसी को शत प्रतिशत मतदाताओं के लिए जारी किया गया है, इसलिए चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार, ईपीआईसी चुनाव के दौरान मतदाताओं की पहचान के लिए एक अनिवार्य दस्तावेज होगा।वोटर स्लिप को पहचान पत्र नहीं माना जाएगा। ऐसे मतदाता जिनके पास ईपीआईसी नहीं है, वे अपने मतदाता पंजीकरण अधिकारी से तुरंत संपर्क करें।

चुनाव आयोग ने पहचान के लिए अन्य वैकल्पिक दस्तावेजों में पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, केंद्र या राज्य सरकार, सार्वजनिक उपक्रमों, पब्लिक लिमिटेड कंपनियों की ओर से कर्मचारियों को जारी किए गए फोटोग्राफ लगे सेवा पहचान पत्र, बैंक, पोस्ट ऑफिस की पासबुक, पैन कार्ड, एनपीआर के तहत आरजीआई द्वारा जारी स्मार्ट कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, श्रम मंत्रालय की योजना के तहत जारी स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड, पेंशन दस्तावेज, सांसदों-विधायकों, एमएलसी को जारी आधिकारिक पहचान पत्र और आधार कार्ड को अधिकृत किया है।

कानून व्यवस्था बनाए रखने को तैनात रहेगी पुलिस और अर्धसैनिक बल

रंजन ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान प्रदेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात होंगे। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराया जाएगा। चुनाव आयोग खर्च, चुनाव, मतदान और आदर्श आचार संहिता इत्यादि की गतिविधियों की निगरानी के लिए पर्यवेक्षकों और सामान्य पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करेगा। रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा नामांकन, छंटनी, चुनाव चिह्न का आवंटन, ईवीएम की तैयारी और भंडारण इत्यादि सहित सभी महत्वपूर्ण कार्यों की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। रैंडमाइजेशन के माध्यम से मतदान दलों का गठन किया जाएगा।

पीडब्ल्यूडी एप भी शुरू किया
चुनाव आयोग ने पीडब्ल्यूडी एप भी शुरू किया है, जिसे एंड्रॉएड मोबाइल पर प्ले स्टोर और एप स्टोर के माध्यम से डाउनलोड किया जा सकता है। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए मतदाताओं को पीडब्ल्यूडी एप डाउनलोड करने के बाद स्वयं को चिह्नित करना होगा। एप पर ईपीआईसी नंबर अपलोड करके वाहन की सुविधा व व्हील चेयर की सुविधा के लिए आग्रह कर सकते हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजीव रंजन ने मतदाताओं को धर्म, जाति, समुदाय, भाषा या किसी भी प्रकार के विचार से प्रभावित हुए बिना निडर होकर मतदान करने की अपील की है।
विज्ञापन

आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत कर सकेंगे

चुनाव आयोग ने इस बार के लोकसभा चुनाव में पहली बार सी-विजिल एप शुरू की है। एंड्रॉएड फोन वाले सभी व्यक्ति इस एप पर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत अपलोड कर सकते हैं। गूगल प्ले स्टोर से ये एप डाउनलोड करना होगा। शिकायत जीपीएस के साथ कनेक्ट होकर रियल टाइम प्रदर्शित करेगी।

पांच मिनट से पुरानी फोटो या वीडियो अपलोड नहीं हो पाएगी। इससे पुराने वीडियो अपलोड करने से निजात मिलेगी। शराब, पैसे का लेनदेन और अनाधिकृत गतिविधियों की शिकायत कर सकते हैं। फिर मजिस्ट्रेट व पुलिस शिकायत स्थल पर पहुंचकर बीस मिनट में उसका निवारण करने की कोशिश करेंगी।

कार्रवाई करके शिकायत का स्टेट्स अपडेट किया जाएगा। 99 फीसदी केस सौ मिनट के भीतर सुलझाने की कोशिश चुनाव आयोग की होगी। इसमें एफआईआर, जरूरी कार्रवाई इत्यादि शामिल हैं। अन्य शिकायतें नेशनल शिकायत निवारण सिस्टम पर चली जाएंगी। चुनाव को स्वच्छ बनाने के लिए यह कदम उठा गया है।

दफ्तरों में शिकायत के लिए आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर किसी कद्दावर नेता या व्यक्ति के खिलाफ कोई शिकायतकर्ता अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहता तो उसका भी प्रावधान किया गया है। पहचान सार्वजनिक न करने वाले व्यक्ति को कार्रवाई का स्टेट्स ऑनलाइन नहीं पता चल सकेगा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें