'आप' ने दो टूक कह दिया है कि वह किसी भी कीमत पर आनंदपुर साहिब सीट नहीं छोड़ेगी। इस असमंजस के चलते 'आप' और शिरोमणि अकाली दल (टकसाली) के बीच गठबंधन पर मंगलवार को भी सहमति नहीं बन सकी। 'आप' आनंदपुर साहिब हलके से काफी समय पहले नरिंदर शेरगिल को अपना उम्मीदवार बना चुकी है। इससे पहले विधानसभा चुनाव में शेरगिल को खरड़ से टिकट दिया गया था। लेकिन बाद में कंवर संधू जैसे सीनियर नेता ने खरड़ से लड़ने की इच्छा जताई। इसके चलते शेरगिल को ऐन मौके पर खरड़ छोड़ कर मोहाली जाना पड़ा था। जबकि, वह खरड़ में काफी तैयारी और प्रचार कर चुके थे। वहीं, मोहाली में उनको उतना समय नहीं मिल सका।
इस बार भी शेरगिल की आनंदपुर साहिब से उम्मीदवारी का एलान काफी पहले हो गया था। उसके बाद से वे लगातार हलके में सक्रिय हैं। लेकिन इस बार 'आप' हाईकमान ने तय कर लिया है कि शेरगिल को नहीं हटाया जाएगा, चाहे टकसालियों से गठबंधन हो या न हो। 'आप' ने शिअद-टकसाली को यह स्पष्ट भी कर दिया है। टकसाली यहां से पूर्व डिप्टी स्पीकर बीर दविंदर को लड़ाने पर अड़े हैं। 'आप' ने प्रस्ताव दिया है कि बीर दविंदर चाहें तो 'आप' के टिकट पर बठिंडा जैसी हाई प्रोफाइल सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। वहां, 'आप' का काफी आधार है, कई विधायक हैं। हरसिमरत कौर बादल के खिलाफ लड़ने से यह सीट चर्चा में भी रहेगी।