लोकसभा चुनाव 2019 के लिए तारीखों का एलान हो गया और चंडीगढ़ के उम्मीदवारों को 70 दिन का समय मिला है। इस समय के कुछ फायदे भी हैं और कुछ नुकसान भी। क्योंकि चुनाव एक तरह का एग्जाम हैं। समय पर हो जाए, अच्छे से हो जाएं और बेहतर परिणाम रहे, हर कोई ऐसा चाहता है। ऐसे ही हर उम्मीदवार की ख्वाहिश होती है कि चुनाव जल्द निपटें और रोज की मान-मनौव्वल से छुटकारा मिल जाए, लेकिन इस बार चंडीगढ़ में लोकसभा चुनाव आखिरी चरण में हैं।
19 मई को वोट डाले जाएंगे, यानी अब से करीब 70 दिन बाद। उम्मीदवारों को प्रचार करने का पूरा वक्त मिलेगा। मगर यही वक्त उनके लिए मुसीबत बन जाएगा। साल 2014 में पांच मार्च को चुनाव की घोषणा हुई थी और दस अप्रैल को चंडीगढ़ में वोटिंग हो गई थी। उम्मीदवारों को करीब एक महीने का वक्त मिला था। उस एक महीने में दावेदारों की घोषणा हुई। प्रचार हुआ और वोट भी डाल दिए गए, लेकिन इस बार उम्मीदवारों के पास पूरे 70 दिन हैं।
ज्यादा दिन होने की वजह से चुनाव प्रचार अब अधिक दिन करना होगा। क्योंकि चुनाव प्रचार अब सस्ता नहीं रहा, इसलिए उम्मीदवारों को ज्यादा जेब ढीली करनी होगी। अप्रैल के आखिर में गर्मी अपने चरम में आ जाएगी। मई आते-आते तापमान 40 के आसपास पहुंच जाएगा। धूप इतनी कड़ी होती है कि दोपहर के वक्त सड़कें खाली हो जाती हैं। मतलब पसीना भी अधिक बहाना पड़ेगा। साथ में सेहत का ध्यान भी रखना होगा।
टीम में गुटबाजी न हो, इसलिए लंबे समय तक कार्यकर्ताओं को मैनेज करना होगा। कोई नाराज है तो कोई अंदरखाते विरोधियों की मदद कर रहा है। ऐसे लोगों से रोज निपटना किसी चुनौती से कम नहीं है।
देश का मूड भी काफी हद तक पता चल जाएगा
आखिरी फेज में वोटिंग का एक डरावना पक्ष यह भी है कि जब तक यहां के लोगों की बारी आएगी, तब तक काफी हद तक उन्हें देश का मूड पता चल जाएगा। यह बात भी उम्मीदवारों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। सोशल मीडिया की वजह से अब यह पता करना मुश्किल नहीं रहा कि हवा का रुख किस दिशा की ओर है। गुटबाजी होने के कारण दावेदारों को हर दूसरे दिन अपनी चुनावी रणनीति बदलनी पड़ेगी।
धवन तो पिछले तीन महीने से चुनाव प्रचार कर रहे हैं
आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार हरमोहन धवन पिछले तीन महीने से चुनाव प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने एक चुनावी रैली भी कर दी है। अब उन्हें दो महीने और चुनाव प्रचार करना होगा। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनकी मुश्किलें कितनी बढ़ गई होंगी। हालांकि उनका कहना है कि वे इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक देंगे। दावा किया है कि वे इन 70 दिन में चुनाव अपने पक्ष में कर लेंगे।
टिकट की घोषणा भी अब देर से होगी
पार्टियों का पहला फोकस वहां होगा, जहां चुनाव पहले फेज में होने हैं। पहले फेज में उम्मीदवारों की घोषणा और चुनाव तैयारियों पर पूरा ध्यान रहेगा। यहां पर चुनाव सबसे आखिरी में है। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना बढ़ गई है कि यहां उम्मीदवारों की घोषणा देरी से होगी। पहले माना जा रहा था कि चुनाव की घोषणा होते ही एक हफ्ते के भीतर भाजपा व कांग्रेस के उम्मीदवारों के नाम तय हो जाएंगे। इस स्थिति में दावेदार भी पसोपेश में रहेंगे कि वे लोगों के बीच जाएं या नहीं।
एक फायदा भी होगा
हरियाणा में चुनाव 12 मई को होने हैं। चुनाव खत्म होने के बाद हरियाणा की टीम चंडीगढ़ और पंजाब में अपनी-अपनी पार्टियों की मदद कर सकती हैं। पिछली बार हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में एक ही दिन चुनाव हुए थे। ऐसे में एक दूसरे को मदद करने का मौका नहीं मिला था। इस बार मौका जरूर मिलेगा।