साल 2014 में भाजपा ने चंडीगढ़ लोकसभा के लिए अलग से एक घोषणा पत्र जारी किया था। इसमें चंडीगढ़ की जनता से 60 चुनावी वादे किए गए थे। अब समय आ चुका है कि उन चुनावी वादों के पूरे होने या न होने की सत्यता की जांच की जाए। भाजपा सांसद किरण खेर ने अपने संसदीय क्षेत्र में क्या-क्या काम किए। संसद निधि का इस्तेमाल कितना हुआ। इन सबके बारे में दो किस्तों में जानेंगे। पहली किस्त में कुछ अहम मुद्दे, जो शहरवासियों के लिए काफी महत्वपूर्ण थे। आइए जानते हैं उन पर कितना काम हुआ।
वादे, पूरे नहीं हुए
पेड पार्किंग खत्म करने का वादा नहीं हुआ पूरा
चुनाव के दौरान भाजपा की ओर से कहा गया था कि शहर में पेड पार्किंग को खत्म कर दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पेड पार्किंग को स्मार्ट बनाने के नाम पर प्राइवेट कंपनी को करोड़ों रुपये का ठेका दे दिया गया। कंपनी ने इसकी वसूली के लिए पेड पार्किंग के दाम दोगुने कर दिए, जो जनता से वसूले गए। हालांकि हाल ही में पेड पार्किंग के रेट कम कर दिए गए हैं, लेकिन पेड पार्किंग को खत्म नहीं किया गया है।
फिल्म सिटी का निर्माण भी नहीं हो सका
भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि चंडीगढ़ में फिल्म सिटी का निर्माण किया जाएगा, जहां युवाओं को तकनीकी ट्रेनिंग मिलेगी। इससे उन्हें इस दिशा में कैरियर बनाने में मदद मिलेगी। दुर्भाग्यवश यह वादा पूरा नहीं हो सका। साल 2014 में पॉलीवुड डायरेक्टरी के विमोचन के वक्त सांसद किरण खेर ने कहा था कि चंडीगढ़ में उच्च प्रौद्योगिकी वाली मीडिया एंड फिल्म सिटी लाने की कोशिश कर रही हैं और यह तोहफा जल्द ही मिल जाएगा।
शहर में अंतरराष्ट्रीय खेल स्टेडियम भी नहीं बना
इस स्तर का फिलहाल खेल स्टेडियम नहीं बन पाया। हालांकि इन चार पांच सालों में सेक्टरों में स्पोर्ट्स कांप्लेक्स खोलने पर जोर दिया गया। सेक्टर 34, 43, मनीमाजरा, सेक्टर 38 वेस्ट, 50 और 56 में कांप्लेक्स खोले गए हैं। सांसद के गांव सारंगपुर में पहली बार ग्रामीण खेलों का आयोजन किया गया। यहां पर पिछले साल ही स्टेडियम बनाया गया था। चंडीगढ़ के स्पोर्ट्स प्रेमी इसकी मांग काफी समय से कर रहे हैं, इसलिए भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में शामिल किया था।
ये वादे भी पूरे नहीं किए गए
ठेका कर्मचारियों को पक्का करने का वादा भी पूरा नहीं हुआ
एक भी ठेका कर्मचारी पक्का नहीं किया गया। चंडीगढ़ में करीब 20 हजार कर्मचारी कांट्रैक्ट पर काम करते हैं। चंडीगढ़ सब-आर्डिनेट सर्विस फेडरेशन के प्रधान रणजीत सिंह हंस ने बताया कि उन्होंने कई बार प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। प्रशासन से यहां तक कहा गया कि पंजाब ने साल 2011 में कांट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए जो नीति लागू की थी, उसे ही चंडीगढ़ में लागू किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पहले चौथे दर्जे के कर्मचारियों की भर्ती पक्के कर्मचारियों के तौर पर की जाती थी, लेकिन अब कांट्रैक्ट पर ही की जा रही है।
पांच सीजीएचएस और दो हॉस्पिटल का वादा भी हवाहवाई
भाजपा ने चंडीगढ़ की स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए पांच सीजीएचएस डिस्पेंसरी और दो मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल खोलने का वादा किया था। फिलहाल एक भी सीजीएचएस डिस्पेंसरी नहीं खुली। सेक्टर -48 में हॉस्पिटल की बिल्डिंग जरूर बनकर तैयार हो गई। उसका उद्घाटन भी हो चुका है, लेकिन इससे मरीजों को अब तक इलाज नहीं मिला है। मलोया और धनास में 50-50 बेड के हॉस्पिटल का निर्माण किया जाना है।
चंडीगढ़ को नशामुक्त बनाने पर भी कामयाबी नहीं मिली
भाजपा ने घोषणा की थी कि चंडीगढ़ को नशामुक्त बनाया जाएगा। फिलहाल इस मोर्चे पर कामयाबी नहीं मिली है। साल 2014 के बाद तस्करी के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। एनडीपीएस एक्ट के तहत साल 2013 में 101, साल 2014 में 137, साल 2015 में 173, साल 2016 में 144, साल 2017 में 244 और साल 2018 में 167 मामले दर्ज किए गए हैं। इन आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि शिकंजा तो कसा गया, लेकिन हर साल नए मामले परेशानी भी खड़ी कर रहे हैं और यह भी संकेत मिल रहे हैं कि चंडीगढ़ नशामुक्त नहीं हो पाया।
ये दो बड़े काम हुए
सरकारी कर्मचारियों को मकान देने के प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी
यह मुद्दा करीब दस साल पुराना है। साल 2008 में इसका प्रपोजल बनाया गया था। इसी साल जनवरी में केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इसके तहत करीब 3930 मकान बनने हैं। इस प्रोजेक्ट को पास कराने का श्रेय मौजूदा सरकार को ही जाता है। हालांकि यह कब तक तैयार होगा, इस बारे में अभी कोई चर्चा नहीं है। एक पेंच और फंसा हुआ कि कर्मचारियों को मौजूदा कलेक्टर रेट पर दिया जा रहा है, जबकि कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें साल 2008 के रेट पर दिए जाए।
हर तीन महीने बाद खुला दरबार
भाजपा ने जब इस मुद्दे को घोषणा पत्र में शामिल किया तो यह नहीं पता चल पाया कि वे सांसद की बात कर रहे हैं या प्रशासक की। पहले सांसद की बात करें, तो किरण खेर ने खुला दरबार लगाकर लोगों की समस्याएं सुनी हैं। सांसद के दफ्तर की ओर से बताया गया है कि वे अब तक 20 से ज्यादा खुले दरबार लगा चुकी हैं। हाल ही में उन्होंने काफी विद किरण शुरू किया, जिसमें उन्होंने यूनिवर्सिटी के छात्रों से संवाद किया। इसके अतिरिक्त वे लोगों के साथ छोटी-छोटी मीटिंग करती रही हैं।
साल 2014 में जो भी वादे किए गए थे, वो लगभग पूरे हो चुके हैं।
- संजय टंडन, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष
भाजपा का चुनावी घोषणा पत्र किसी जुमले से कम नहीं हैं। पूरे पांच साल लोगों से धोखा किया गया है। भाजपाई कह रहे हैं कि हमने आवेदकों की उम्र बढ़ा दी, लेकिन नौकरियां कितनी दी गईं। इस बारे में उनकी ओर से कोई दावा नहीं किया जा रहा।
- सुभाष चावला, पूर्व मेयर व कांग्रेसी नेता