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सियासी वार: बादल ने कैप्टन को बताया सिख पंथ का गद्दार

Wed, 02 Apr 2014 09:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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कैप्टन को एक सिख के वेष में पंथ का गद्दार करार देते हुए उन्होंने कहा कि जून 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिंरा गांधी ने उन्हें सिखों पर कंट्रोल करने की साजिश के तहत अपना गुप्त एजेंट बनाकर शिअद में भेजा था। इसका भेद जल्द ही खुल गया और कैप्टन कुछ वर्ष बाद वापस कांग्रेस में चले गए। यहां जारी एक बयान में बादल ने कहा कि वे अपने पुराने जख्म नहीं कुरेदना चाहते हैं लेकिन यह व्यक्ति उस परिवार से है, जिसने 1764 में अहमद शाह अब्दाली को उस समय शरण दी थी, जब वह श्री अकाल तख्त साहिब पर हमला करके वापस आया था।
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सियासी बदले के डर से भागे थे विदेश

अहमद शाह अब्दाली से लेकर इंदिरा गांधी तक पटियाला के महाराजाओं ने हमेशा उनका साथ दिया, जिन्होंने श्री अकाल तखत साहिब पर हमले किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अमरिंदर सिंह एक कायर हैं, जो 2007 में अकाली-भाजपा गठबंधन की सरकार बनने के बाद सियासी बदले के डर से सुखबीर सिंह बादल से डरते हुए देश छोड़कर भाग गए थे। वे तभी वापस अए, जब उनको भरोसा हो गया कि नई सरकार बदले की नीति पर नहीं चलेगी।

फिर निकला ऑपरेशन ब्लू स्टार का जिन्न

बादल ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ऑपरेशन ब्लू स्टार के संबंध में पूरी तरह से झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे इंदिरा गांधी द्वारा तैयार किए गए उस व्हाइट पेपर को सच के सुबूत के तौर पर पेश कर रहे हैं, जिसके बारे में हर कोई जानता है कि वह व्हाइट पेपर केंद्र सरकार के गलत फैसले को सही ठहराने तथा सिख कौम व इसके नेताओं को बदनाम करने के लिए तैयार किया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद उनके साथ मुख्यमंत्री की कुर्सी का सौदा करने के लिए एक ‘चोटी के व्यक्ति’ को पचमढ़ी जेल में भेजा था। जब उन्हें इस बात का पता लगा तो उन्होंने जेल में अपने कमरे को अंदर से ही कुंडी लगाकर बंद कर लिया।
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बादल ने कहा, मैं पंजाब समझौते के खिलाफ

उन्होंने कहा कि यह बात भी एक बड़े व्यक्ति द्वारा लिखी गई किताब में दर्ज है, जिसे अमरिंदर सिंह पढ़ लें। बादल ने कहा कि वे पंजाब समझौते के इसलिए खिलाफ थे, क्योंकि वे चाहते थे कि समझौते पर हस्ताक्षर से पहले पंजाबियों की मुख्य मांगें मान ली जाएं। बादल ने कहा कि उनकी इस इच्छा को नजरअंदाज करके कैप्टन अमरिंदर ने अन्य नेताओं से समझौते पर हस्ताक्षर करवा लिए। बादल ने कैप्टन से सवाल किया कि उन्हें तो इसके बदले पंजाब सरकार में कैबिनेट का सीनियर पद मिल गया लेकिन पंजाब को इस समझौते से क्या मिला?
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