शिरोमणि अकाली दल से पूर्व विधायक इकबाल सिंह झूंदा को मैदान में उतारा है। बसपा ने यहां से मक्खन सिंह और शिरोमणि अकाली दल अमृतसर ने मौजूदा सांसद सिमरनजीत सिंह पर एक बार फिर से दांव खेला है, जिसके चलते मुकाबला बहुकोणीय व रोचक हो गया है। इससे मतदात भी कुछ उलझे हुए दिख रहे हैं। संगरूर सीट की खासियत ये है कि यहां की जनता ने सभी राजनीतिक दलों को मौका दिया है। अगर 1996, 1998, 2014 व 2019 को छोड़ दिया जाए तो हर चुनाव में लोगों ने यहां चेहरा बदल दिया है। बेरोजगारी यहां सबसे बड़ा मुद्दा है।
आप संगरूर सीट को मुख्यमंत्री भगवंत मान का गढ़ मानती है, क्योंकि वह दो बार लगातार यहां से सांसद रह चुके हैं, लेकिन इस बार मान खुद चुनाव मैदान में नहीं हैं। पार्टी ने कैबिनेट मंत्री गुरमीत सिंह मीत को हेयर को उतारा है। आप के लिए चुनौती यह है कि विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत दर्ज करने के बावजूद वर्ष 2022 में इस सीट पर हुए उपचुनाव में उनको हार का सामना करना पड़ा था। शिअद अमृतसर के सिमरनजीत सिंह मान इस सीट से चुनाव जीत गए थे। अब फिर से मान इस सीट से चुनाव मैदान में कूद गए हैं। इसी तरह कांगेस से विधायक सुखपाल सिंह खैरा इस बार चुनाव लड़ रहे हैं।
खैरा खुलकर ये कह चुके हैं कि उनका मुकाबला मीत हेयर से नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री भगवंत मान से है। वह मान को इस सीट पर चुनाव लड़ने की चुनौती तक दे चुके हैं। मान लोगों से अपील कर रहे हैं कि 2014 और 2019 की तरह ही इस बार भी लोग उनका साथ दें। भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट पर हिंदू चेहरे को उतार कर एक बार फिर से सभी चौंका दिया है। पार्टी ने पूर्व विधायक अरविंद खन्ना पर दांव खेला है, क्योंकि संगरूर में 35 प्रतिशत संख्या हिंदू मतदाताओं की मानी जाती है। इस लोकसभा क्षेत्र में पांच बड़े शहर हैं और शहरी मतदाताओं को भाजपा अपना वोट बैंक मानती है।
उपचुनाव जीत चुके हैं शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के सिमरनजीत मान
वर्ष 2022 में भगवंत मान के पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के साथ ही ये सीट खाली हो गई थी, जिसके बाद हुए उपचुनाव में शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के सिमरनजीत सिंह मान ने जीत दर्ज की थी। यही कारण है कि सिमरनजीत मान के हौसले बुलंद हैं और वह फिर से चुनाव मैदान में कूद गए हैं।
बसपा ने शिअद से तोड़ लिया था नाता
इसी तरह शिरोमणि अकाली दल ने इकबाल सिंह झूंदा को चुनाव मैदान में उतारा है। झूंदा दो बार के विधायक हैं। वर्ष 2007 में आजाद प्रत्याशी के रूप में धूरी से लड़ा था और जीत हासिल की थी। यही कारण है कि झूंदा का भी क्षेत्र में अच्छा होल्ड माना जाता है। बहुजन समाज पार्टी ने भी इस बार प्रदेश की सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ रही है। संगरूर से पार्टी ने डॉक्टर मक्खन सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बसपा ने शिअद से अपना नाता तोड़ लिया था और अकेले ही चुनाव लड़ने का फैसला लिया था।
15.55 लाख मतदाता तय करेंगे भविष्य
संगरूर सीट पर 1765 पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं, जिन पर सभी प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला होगा। संगरूर में कुल 15,55,370 मतदाता हैं, जिसमें 8,23,448 पुरुष और 7,31,876 महिला मतदाता हैं, जबकि थर्ड जेंडर के 46 मतदाता भी अपना मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे।
विस चुनाव में नौ सीटों पर आप के पक्ष में गया था जनादेश
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में संगरूर लोकसभा सीट के अधीन आती सभी नौ विधानसभा सीटों पर मतदाताओं ने आप के पक्ष के फैसला सुनाया था। लहरा विधानसभा क्षेत्र से आप के बरिंदर कुमार गोयल ने शिरोमणि अकाली दल संयुक्त के परमिंदर सिंह ढींडसा को 26518 मतों से मात दी थी। दिड़बा से आप के हरपाल सिंह चीमा ने शिअद के गुलजार सिंह को 50655 मतों से हराया था। इसी तरह सुनाम में अमन अरोड़ा ने कांग्रेस के जसविंदर सिंह धीमान 75277 मतों से मात दी थी। भदौड़ से लाभ सिंह ने कांग्रेस के चरणजीत सिंह चन्नी को हराकर जीत दर्ज की थी। इसी तरह बरनाला से गुरमीत सिंह मीत हेयर, महलकलां से कुलवंत सिंह, मालेरकोटला से मोहम्मद जमील उर रहमान, धूरी से भगवंत मान और संगरूर से नरिंदर कौर ने जीत दर्ज की थी।
पिछले 10 चुनाव में इस तरह बदलते चले गए चेहरे
संगरूर में 2022 उप चुनाव में शिअद अमृतसर के सिमरनजीत सिंह मान ने चुनाव जीता था। उनसे पहले वर्ष 2019 और 2014 में लगातार आम आदमी पार्टी से भगवंत मान सांसद रहे। इससे पहले 2009 में कांग्रेस के विजय इंदर सिंगला ने चुनाव जीता था। 2004 में शिरोमणि अकाली दल के सुखदेव सिंह ढींडसा इस सीट पर जीतकर संसद पहुंचे। 1999 में शिअद अमृतसर के सिमरनजीत सिंह मान ने चुनाव जीता था। 1996 और 1996 चुनाव में सुरजीत सिंह बरनाला लगातार यहां से सांसद चुने गए थे। 1991 में कांग्रेस के गुरचरण सिंह और 1989 में शिअद अमृतसर के राजदेव सिंह सांसद चुने गए थे।
दो बार नींव का पत्थर रखे जाने के बाद भी शुरू नहीं हो सका मेडिकल कॉलेज का निर्माण
नेताओं के लिए लोगों के सवालों का जवाब देना हो रहा मुश्किल संगरूर सीट पर कई अहम मुद्दे सियासी दलों पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। संगरूर में मेडिकल कॉलेज का दो बार नींव पत्थर रखे जाने के बावजूद कॉलेज का निर्माण शुरू नहीं हो पाया। पूरे क्षेत्र में कोई बडा उद्योग न आने के चलते भी लोगों में रोष है। बेरोजगारी का मुद्दा यहां हावी है। घग्गर दरिया सहित लावारिस पशुओं की समस्या ने अलग से लोगों की समस्या बढ़ रखी है।