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टेंशन: सत्ता से बेदखल होने के बाद नेताओं का कांग्रेस से किनारा, दो साल में 20 से अधिक बड़े चेहरों ने छोड़ा हाथ

Sat, 16 Mar 2024 12:22 PM IST
शाहरुख खान सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर

सार

सत्ता से बेदखल होने के बाद कई नेताओं ने कांग्रेस से किनारा कर लिया। 2022 के विधानसभा चुनाव की हार भारी पड़ गई। नेता लगातार छोड़ कर जा रहे हैं। कैप्टन अमरिंदर ने विस चुनाव से पहले पार्टी छोड़ी थी। उसके बाद कतार लग गई। लोकसभा चुनाव सिर पर है। बिखराव के कारण पंजाब कांग्रेस की चुनौती बढ़ रही है।
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Lok Sabha Election 2024 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब में सत्ता से बेदखल होने के बाद कई नेताओं ने कांग्रेस से किनारा कर लिया है। होशियारपुर के चब्बेवाल से विधायक और कांग्रेस विधायक दल के उपनेता डा. राजकुमार चब्बेवाल शुक्रवार को आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए। बीते दिन पटियाला से कांग्रेस सांसद परनीत कौर ने भाजपा ज्वाइन कर ली थी। 
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विधानसभा चुनाव में हार के बाद पिछले दो साल में  20 से ज्यादा बड़े नेता कांग्रेस छोड़ चुके हैं। हालांकि, भाजपा में गए कुछ नेताओं ने घर वापसी भी की, लेकिन अब लोकसभा चुनाव से ठीक पहले फिर कांग्रेस छोड़ने वालों की कतार बढ़ गई है।

साल 2022 के विधानसभा के चुनाव की हार के बाद शुरू हुआ नेताओं के पार्टी छोड़ने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने तो विधानसभा चुनाव से पहले उस समय पार्टी छोड़ दी थी, जब उन्हें सीएम की कुर्सी के हटा दिया था। वह भाजपा में शामिल हो गए। उसके बाद पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुनील जाखड़ भी भाजपा के हो गए। 
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पार्टी इन दो बड़े झटकों से अभी उबर भी नहीं पाई थी कि एक के बाद एक नेताओं ने पार्टी से किनारा करना शुरू कर दिया। अब लोकसभा चुनाव सिर पर हैं, लेकिन पार्टी नेताओं का जाना थम नहीं रहा है। पंजाब में दो बार कांग्रेस को सत्ता में लाने वाले पटियाला रियासत के उत्तराधिकारी कैप्टन अमरिंदर पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। पहली बार साल 2002 से 2007 तक पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में काम किया। 

कैप्टन ने पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले 18 सितंबर 2021 को पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देकर अपनी पार्टी का गठन किया और बाद में वह बीजेपी में शामिल हो गए। इसके बाद बेटी जयइंदर कौर और बीते दिन कैप्टन की पत्नी और पटियाला से कांग्रेस सांसद परनीत कौर  भी भाजपा में शामिल हो गईं।

 

सुनील जाखड़ पंजाब के बड़े कांग्रेस नेता थे। वह 2017 से 2021 तक पंजाब कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के अध्यक्ष भी रहे। तीन बार विधायक रहे सुनील जाखड़ ने वर्ष 2012-2017 के बीच विधानसभा में विपक्ष के नेता की भी भूमिका निभाई। वर्ष 2017 में गुरदासपुर से लोकसभा सदस्य भी निर्वाचित हुए, उन्होंने 14 मई 2022 को कांग्रेस को अलविदा कर दिया। पहले वह गर्व से कहते थे कि उनकी तीन पीढ़ियां कांग्रेस में रही हैं। अब सुनील जाखड़ भी बीजेपी में हैं और प्रदेशाध्यक्ष हैं। 

 

पंजाब के तेजतर्रार वकील जयवीर शेरगिल ने पिछले साल यानी अगस्त 2022 में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने से पहले वह कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता थे और कांग्रेस पार्टी की पंजाब इकाई की लीगल सेल के अध्यक्ष भी थे। वह भी भाजपा में शामिल हो गए।

नौ में से तीन ने की वापसी
कांग्रेस को अलविदा कह चुके मनप्रीत बादल पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब के संस्थापक थे और उन्होंने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय करा दिया था। बादल ने बीजेपी का दामन थाम लिया। मनप्रीत बादल अमरिंदर सिंह की सरकार में पंजाब के वित्त मंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा पंजाब के पूर्व मंत्री गुरप्रीत कांगड़, राजकुमार वेरका, बलवीर सिंह सिद्धू, पूर्व विधायक फतेहजंग बाजवा, पूर्व विधायक हरविंदर सिंह लाडी, जीत मोहिंदर सिद्धू. राणा गुरमीत सोढ़ी, केवल सिंह ढिल्लों ने पार्टी को अलविदा कर दिया, लेकिन उपरोक्त नौ नेताओं ने तीन ने वापसी कर ली थी।

इसमें गुरप्रीत कांगड़, बलवीर सिंह सिद्धू, राजकुमार वेरका शामिल थे। इन नेताओं के आगमन के बाद भी कांग्रेस का बिखरना जारी रहा। पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय सचिव व पूर्व विधायक अश्वनी सेखड़ी ने कांग्रेस से किनारा कर भाजपा को ज्वाइन कर लिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्वनी कुमार ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया। 

उपचुनाव से पहले रिंकू हुए आप के 
पूर्व विधायक सुशील रिंकू ने पार्टी को छोड़ दिया और पिछले साल जालंधर लोकसभा के उपचुनाव लड़े, जिसमें वह आप के सांसद बने। रिंकू के बाद जीपी ने पार्टी को छोड़ा और आप ज्वाइन की, जिसके बाद आप ने वीरवार को उनको लोकसभा प्रत्याशी घोषित कर दिया। वहीं कैप्टन की पत्नी महारानी परनीत कौर ने भी पार्टी को अलविदा कह दिया और भाजपा का दामन थाम लिया। 

स्वार्थी नेता कहीं सफल नहीं होंगे: वड़िंग
पार्टी छोड़ने वाले लोगों को पार्टी के मंच पर हर बात कहने का मौका दिया गया, लेकिन उन्होंने सार्वजनिक मंच पर पार्टी को बदनाम करना बंद नहीं किया। यही कारण है कि कुछ नेताओं को पार्टी ने खुद ही बाहर कर दिया और कुछ अपने स्वार्थ के कारण चले गए, लेकिन जब उन्हें गलती का एहसास हुआ तो लौट भी आए। अब भी गए हुए लोगों का स्वागत है। साथ जो निहायत स्वार्थी हैं, वे कहीं भी सफल नहीं होंगे। -अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, अध्यक्ष, पंजाब कांग्रेस

कांग्रेस में नेताओं का सम्मान नहीं: जाखड़
कांग्रेस में लंबे अरसे से जुड़े नेताओं का सम्मान नहीं है। पार्टी के अंदर पार्टी के ही लोगों की आवाज नहीं सुनी जाती तो आम लोगों की आवाज क्या सुनी जाएगी। यही कारण है कि कांग्रेस से लोग छोड़-छोड़ कर जा रहे हैं। यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनहितैषी नीतियों से प्रभावित होकर लोग लगातार भाजपा के साथ जुड़ रहे हैं। हमारा कुनबा पहले की तुलना में और मजबूत हुआ है। -सुनील जाखड़, अध्यक्ष, पंजाब भाजपा

हमारी विकास की नीति से प्रभावित हो रहे लोग: कंग
आम आदमी पार्टी विकास की राजनीति करती है। हमने दिल्ली और पंजाब में जो मॉडल पेश किया है, उसी का नतीजा है कि बड़े स्तर पर अन्य पार्टियों के नेता हमारे यहां आ रहे हैं। हम इन सबका सम्मान और स्वागत करते हैं। हमारा एक ही मकसद है कि नकारात्मक राजनीति को छोड़कर पंजाब को आगे ले जाने के लिए काम करना है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार यह काम बहुत अच्छे तरीके से कर रही है। -मलविंदर सिंह कंग, मुख्य प्रवक्ता, आप 
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पंथ और पंजाब ही हमारी प्राथमिकता: सुखबीर
पंथ की रक्षा और पंजाब का विकास ही हमारी पार्टी की प्राथमिकता है। कुछ लोग शिअद से छिटक गए थे, लेकिन उनको फिर से सम्मानपूर्वक तरीके से वापस पार्टी में लाया गया है। कांग्रेस में पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं को नजरंदाज किया जा रहा है। यही कारण है कि वहां हड़बड़ी मची हुई है। इन लोकसभा चुनाव में हम मजबूत तरीके से उभरेंगे। आप सरकार की नीतियों से भी लोग तंग आ चुके हैं। -सुखबीर बादल, अध्यक्ष, शिअद
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