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लोकसभा चुनावः पवन बंसल का नाम फाइनल, तो नवजोत कौर ने हाईकमान से की शिकायत, बोलीं...

Wed, 20 Feb 2019 03:00 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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नवजोत कौर सिद्धू
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लोकसभा चुनाव से पहले टिकट के लिए कांग्रेस में दावेदारों के बीच घमासान मचा हुआ है। नवजोत कौर सिद्धू ने हाईकमान के सामने आपत्ति दर्ज कराई है। दरअसल, प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में पूर्व सांसद पवन बंसल के नाम की सर्वसम्मति से सिफारिश की गई है। इससे नवजोत कौर नाराज हैं। नवजोत कौर खुद भी चंडीगढ़ लोकसभा सीट से टिकट की दावेदार हैं।
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उनका कहना है कि जिस तरह से बंसल के नाम को एक बंद कमरे में फाइनल किया गया है, वह पूरी तरह से गैरकानूनी है। चुनाव समिति के सभी सदस्य पवन बंसल के करीबी हैं। बैठक में वह खुद भी शामिल थे। ऐसे में बैठक की पारदर्शिता पर कैसे भरोसा किया जा सकता है। जब किसी का नाम फाइनल हो रहा हो तो वह खुद उस बैठक में कैसे मौजूद रह सकता है। दूसरे दावेदारों को भी बुलाकार उनसे विचार-विमर्श करना चाहिए था।

नवजोत कौर ने इस मामले की शिकायत आलाकमान से की है। उनका कहना है कि पार्टी का इस मामले में सर्वे कराना चाहिए। जिसका नाम सर्वे में फाइनल हो, उसी को टिकट मिलनी चाहिए, न कि एक बंद कमरे में बैठकर तय किया जाए। उधर, इस बारे में मनीष तिवारी से भी संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनके दुबई में होने के कारण उनसे बात नहीं हो सकी।
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चुनाव समिति ने बंसल के नाम की सिफारिश की

कांग्रेस चुनाव समिति की बैठक रविवार को आयोजित हुई थी। इसकी चेयरमैन आल इंडिया कांग्रेस की जनरल सेक्रेटरी आशा कुमारी हैं और बैठक की अध्यक्षता भी उन्होेंने की। कमेटी के दस सदस्य हैं, जिसमें पवन बंसल, प्रदीप छाबड़ा, पवन शर्मा, हाकम सरहदी, विनोद शर्मा, भूपिंदर सिंह बड़हेड़ी, डा. इरशाद हसन, महिला कांग्रेस की प्रधान, सेवा दल के प्रधान और एनएसयूआई के प्रेसिडेंट शामिल थे।

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक सभी सदस्यों को एक कागज दिया गया, जिसमें चार दावेदार पवन बंसल, नवजोत कौर, मनीष तिवारी व सविता सिसोदिया का नाम था। सभी से एक नाम को फाइनल कर उसे बंद लिफाफे में देने को कहा गया लेकिन बंद लिफाफा खुल गया और यह बात लीक हो गई कि दस में से नौ ने पवन बंसल के नाम की सिफारिश की है।  हालांकि जब सदस्यों से एक  नाम फाइनल किए जाने की बात कही जा रही थी, तब बंसल उठकर जाने लगे, लेकिन आशा कुमारी ने उन्हें रोक लिया और कहा कि ओपन डिस्कशन नहीं है। सीक्रेट वोटिंग हो रही है। बंसल रुक गए, लेकिन वोटिंग नहीं की।

बाहर से ऑब्जर्वर लगाने की मांग
सूत्रों की ओर से बताया गया है कि नवजोत कौर और मनीष तिवारी ने कांग्रेस आलाकमान से बात कर चंडीगढ़ के लिए एक इंडिपेंडेंट ऑब्जर्वर लगाने की मांग की है। दोनों का मानना है कि पवन बंसल काफी दिनों से चंडीगढ़ में सक्रिय हैं। प्रदेश कमेटी से लेकर चुनाव समिति में बंसल के करीबी हैं। ऐसे में नाम की सिफारिश किए जाने की प्रक्रिया में पारदार्शिता नहीं लाई जा सकती। हालांकि चुनाव समिति के बाद यह नाम स्क्रीनिंग कमेटी के पास जाएगा। स्क्रीनिंग कमेटी में प्रदीप छाबड़ा, आशा कुमारी और के राजू शामिल हैं। वहां से यह नाम कांग्रेस की संसदीय बोर्ड के पास जाएगा।

 
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पहले भी हो चुका है उलटफेर

ऐसा नहीं है कि यदि चुनाव समिति ने नाम फाइनल कर दिया तो आलाकमान ने भी कमेटी की बात पर मुहर लगा दी हो। कई बार उलटफेर होते देखा गया है। लोगों ने आवेदन नहीं किया, फिर आलाकमान के निर्देश पर टिकट मिला। साल 1991 में विनोद शर्मा के नाम पर प्रदेश कमेटी व अन्य लोगों ने सहमति जताई थी।

उस समय पवन बंसल राज्यसभा के मेंबर से हटे थे और पंजाब में सक्रिय थे।  ऐसा माना जा रहा था कि टिकट विनोद शर्मा को ही मिलेगी, लेकिन राजीव गांधी के करीबी होने के कारण टिकट पवन बंसल को मिला था। 80 के दशक में जगन्नाथ कौशल का नाम पैनल ने नहीं भेजा था। दूर-दूर तक उनके नाम की चरचा नहीं थी। वे बिहार के राज्यपाल थे। राज्यपाल से हटने के बाद इंदिरा गांधी के निर्देश पर उन्हें चंडीगढ़ का टिकट दिया गया। वे दो बार से चंडीगढ़ से लडे़।

मैं किसी की बात पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। चंडीगढ़ का होने के नाते मैं कमेटी का सदस्य हूं। मीटिंग में हाजिर था लेकिन मैंने वहां एक भी शब्द नहीं बोला और न ही वोट किया।
- पवन बंसल, पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद चंडीगढ़
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