भजनलाल परिवार: भजनलाल परिवार ने 46 साल में 29 चुनाव लड़े और मात्र चार में हार मिली। आदमपुर 1968 से भजनलाल परिवार का अभेद्य किला बना हुआ है। भजनलाल, उनकी पत्नी जसमा देवी, बेटा चंद्रमोहन बिश्नोई, कुलदीप बिश्नोई, बहु रेणुका बिश्नोई सियासत में सक्रिय रहे हैं। अब तीसरी पीढ़ी से पौत्र भव्य बिश्नोई को उतारने की तैयारी है।
बंसीलाल परिवार: देश के रक्षामंत्री तक रहे बंसीलाल दो बार सीएम बने। राजनीति में उनके बेटे सुरेंद्र सिंह, बहू किरण चौधरी ने कामयाबी से कदम रखा। किरण अब तोशाम से ससुर की विरासत संभाल रही हैं, जबकि पौत्री श्रुति चौधरी संसद में पहुंच चुकी हैं। अब फिर से कांग्रेस श्रुति को भिवानी - महेंद्रगढ़ सीट से उतार रही है।
हुड्डा परिवार : दूसरा सबसे पुराना सियासी परिवार
प्रदेश की सियासत में दूसरा सबसे पुराना हुड्डा परिवार है। लगातार दो बार भूपेंद्र हुड्डा सीएम रहे। उनके दादा मातूराम जहां 1923 में स्वराज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था। परिवार के पांच सदस्य हुड्डा के दादा चौधरी मातूराम, पिता रणबीर सिंह, भाई कैप्टन प्रताप सिंह व बेटे दीपेंद्र हुड्डा चुनाव लड़ चुके हैं। अब चौथी पीढ़ी मैदान में है।
प्रदेश की अहीरवाल बेल्ट में तीन परिवार सक्रिय हैं, इसमें सबसे पुराना राव परिवार हैं। 1857 की क्रांति में परिवार के राव तुलाराम ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।
इंद्रजीत के दादा, राव बलबीर सिंह 1926, 1930 व 1937 में वे पंजाब कौंसिंल के सदस्य रहे। जबकि पिता राव वीरेंद्र सिंह प्रदेश के सीएम रह चुके हैं। बुआ सुमित्रा देवी भी 1967 व 1968 में रेवाड़ी से विधायक रही। राव इंद्रजीत 11 लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं, जिनमें आठ बार जीत हासिल की।
भाजपा के मनोहर लाल की एयर इंट्री, सियासी कुनबों को सीधी चुनौती
प्रदेश की सियासत के अंदर तीन लाल परिवारों के अलावा, रोहतक के हुड्डा व रेवाड़ी के राव परिवार को राज्य की विधानसभा से लेकर लोकसभा तक दबदबा रहा है। 2014 में भाजपा ने अचानक आरएसएस से जुड़े रहे मनोहर लाल को करनाल से चुनाव लड़वाया और सीएम बना दिया। मनोहर लाल के परिवार का कोई सदस्य न पहले राजनीति में रहा और न ही अब उनके सिवाय सक्रिय है। खुद मनोहर लाल अविवाहित हैं।