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चार साल की उम्र में चार लोगों को जिंदगी दे गया मासूम, माता-पिता के जज्बे को आप भी करेंगे सलाम

Fri, 12 Apr 2019 01:25 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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हार्दिक
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चार साल का हार्दिक उन चार लोगों के लिए एक उम्मीद बनकर आया, जिनकी जिंदगी में आशा की कोई किरण नहीं बची थी। करनाल का रहने वाला हार्दिक सिर में चोट की वजह से एक अप्रैल को पीजीआई में दाखिल हुआ था। जिस दिन वह पीजीआई आया, तब से वह कोमा में था। दस दिन तक पीजीआई के डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो सके। 

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कोई भी उम्मीद नहीं दिखने पर पीजीआई के ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर ने हार्दिक के परिजनों से आर्गन ट्रांसप्लांट की बात की। कई बार की बातचीत के बाद परिवार हार्दिक के आर्गन देने के लिए तैयार हो गया।

हार्दिक की दोनों किडनी और कोर्निया दूसरे मरीजों में ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त मिली। जरूरतमंद मरीजों में किडनी ट्रांसप्लांट कर दी गईं, जबकि कोर्निया को संभाल कर रख लिया गया है। मैचिंग के मरीज मिलने के बाद इनका भी ट्रांसप्लांट कर दिया जाएगा। 
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छत से गिर गया था हार्दिक
हार्दिक के परिजनों ने बताया कि घर की दूसरी मंजिल से गिरने से उसे सिर और हाथ पर गंभीर चोट आई थी। उसके ताया सौरभ जैन ने बताया कि एक अप्रैल को वह स्कूल से लौटा था।

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कुछ देर बाद वह छत पर चला गया। उसके पीछे उसकी मम्मी गई, लेकिन तब तक वह नीचे गिर चुका था। छत पर बालकनी भी है, लेकिन अब तक किसी के समझ में नहीं आया कि आखिर हार्दिक छत से नीचे कैसे गिरा। 

परिजन उसे करनाल के एक प्राइवेट हास्पिटल लेकर गए, जहां हालत गंभीर होने पर उसे पीजीआई रेफर कर दिया गया। एक अप्रैल की शाम से पीजीआई के डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। जब कोई रास्ता नहीं बचा तो ट्रांसप्लांट पर विचार-विमर्श किया गया। हार्दिक की फैमिली ट्रांसप्लांट के बारे में पहले से ही जानती थी, इसलिए वह राजी हो गई।

28 अप्रैल को मनाया जाना था पांचवां बर्थ डे
हार्दिक के पिता नितिन जैन अपने बेटे के इस तरह चले जाने से काफी टूट चुके थे। उन्होंने कहा कि भगवान की लीला समझ से परे है। 28 अप्रैल को हार्दिक का पांचवां बर्थ डे मनाए जाने की तैयारी चल रही थी और आज उसका शव लेकर घर जा रहा हूं।

दुख की इस घड़ी पर आर्गन डोनेशन के लिए हां कहना काफी मुश्किल था, लेकिन फिर ख्याल आया कि यदि हमें हार्दिक के लिए किसी अंग की जरूरत पड़ती तो हम जरूर किसी दूसरे से मदद मांगते। यह सोचने के बाद सबने अंगदान के लिए पीजीआई को मंजूरी दे दी।
 
किसी भी परिवार के लिए यह भी काफी दुखद समय होता है। ऐसे मुश्किल वक्त पर अपने बच्चे के आर्गन को डोनेट करने का फैसला लेना बहुत कठिन होता है। हार्दिक के परिवार को मेरा सलाम है, जो दूसरों की जिंदगी को बचाने के लिए अपना दर्द भूल गए। हार्दिक के आर्गन डोनेशन से चार लोगों की जिंदगी में नया सवेरा आया है। -प्रो. विपिन कौशल, नोडल अफसर रोटो पीजीआई
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