किसानों ने सांसद और विधायक का किया विरोध
- फोटो : अमर उजाला
गांव के छोटे अड्डे के समीप स्थित सभास्थल से ठीक पहले पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए बैरिकेड्स भी लगाया था। किसानों को जब इसका पता चला तो उन्होंने चतुराई से काम लेकर मेन अड्डे पर अपने ट्रैक्टर रोक दिए और गांव के अंदर से होकर सीधे सभास्थल तक जा पहुंचे। करीब आधे घंटे के इंतजार के बाद 5.20 बजे सांसद और विधायक वहां पहुंचे।
उनके गाड़ियों से उतरते ही किसानों ने काले झंडे दिखाकर नारे लगाने शुरू कर दिए। करीब 15 मिनट तक किसानों ने लगातार नारेबाजी की। जब सांसद और विधायक ने धर्मशाला के अंदर जाने का प्रयास किया तो हाथों में काले झंडे लिए किसान उनके सामने खड़े हो गए। इस दौरान जब उनके समर्थक आगे बढ़े तो हल्की धक्का-मुक्की भी हुई।
इससे पहले पुलिस की दो पीसीआर भी मौके पर पहुंची। जब सांसद और विधायक ने किसानों से बातचीत करने का प्रयास किया तो उन्होंने स्पष्ट मना कर दिया। करीब सवा छह बजे सांसद और विधायक चिड़िया गांव में आयोजित जनसभा को संबोधित किए बिना ही चले गए। इसके बाद किसान भी धरनास्थल की ओर लौट आए।
सांसद के माइक मांगने पर हाथ जोड़कर मना करता किसान।
- फोटो : अमर उजाला
धर्मशाला में पहुंचे सांसद ने किसानों के विरोध को देखकर खड़े धरना संयोजक विनोद मौड़ी से माइक मांगा और किसानों से बातचीत करने की इच्छा जाहिर की। इस पर किसानों ने माइक देने से मना कर दिया और कहा कि आज वे सुनने नहीं केवल विरोध करने और सुनाने आए हैं।
घोषित थ्री जी अवार्ड राशि से संतुष्ट नहीं किसान
17 गांवों के किसानों की करीब 700 एकड़ जमीन एनएच के दायरे में आई हुई है। इनका कहना है कि मुआवजे के लिए जो थ्री जी अवार्ड राशि घोषित की गई है, उसमें किसानों का पक्ष सुना ही नहीं गया। जो राशि तय हुई वो 35 से 40 लाख है जो बेहद कम है। किसान प्रति एकड़ दो करोड़ रुपये मुआवजे की मांग कर रहे हैं। सात सूत्रीय मांगों के लिए प्रशासन के साथ किसानों की दस वार्ताएं हो चुकी हैं और अब तक मामला सिरे नहीं चढ़ पाने से किसानों में रोष है।
किसानों की अपनी जायज मांगे हैं और उनके विरोध का कतई बुरा नहीं लगा। दुख इस बात है कि ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट रद्द हो सकता है और इसका असर चरखी दादरी जिले के विकास पर पड़ेगा। प्रदेश सरकार तक किसानों की मांगें पहुंचाई जा चुकी हैं।-धर्मबीर सिंह, सांसद