कैप्टन ने लिखा- प्रधानमंत्री के कद के व्यक्ति को ऐसे शर्मनाक कामों में लिप्त नहीं होना चाहिए। जो चुनाव की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मखौल उड़ाए और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता के साथ-साथ सशस्त्र बलों को भी नजरअंदाज करता है। जिन्होंने हमेशा अपने धर्मनिरपेक्ष चरित्र पर गर्व किया है।
कैप्टन ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि प्रधानमंत्री को इस तरह के पूर्वाग्रही व्यवहार में शामिल होने की अनुमति दी जा रही है और चुनाव आयोग पिछले कई हफ्तों से आचार संहिता उल्लघंन के ऐसे मामलों को जानबूझकर रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है।
इससे चुनाव आयोग पर संदेह पैदा होता है, जो आचार संहिता का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई नहीं कर रहा। कैप्टन ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री सुरक्षाकर्मियों के बलिदान को लेकर इतने चिंतित हैं, तो उन्हें अपने निहित स्वार्थों को बढ़ावा देने के लिए उनकी शहादत का फायदा उठाने के बजाय प्रत्येक शहीद के परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की घोषणा करनी चाहिए।