आधी-अधूरी तैयारियों के साथ भाजपा लोकसभा चुनाव जीतने की तैयारी में है। हालत यह है कि पार्टी हाईकमान द्वारा निर्धारित निचले स्तर तक का संगठनात्मक ढांचा ही अब तक पंजाब में नहीं बन सका है। पार्टी नेतृत्व ने लोकसभा चुनाव में जीत के लिए बूथ स्तर पर संगठन खड़ा करने पर फोकस किया है। खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने 28 फरवरी को देश भर में 15 हजार जगहों पर करोड़ों बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं से बात की थी। लेकिन निचले स्तर पर संगठन खड़ा करने का राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का मिशन अब तक पंजाब में पूरा नहीं हो सका है।
पूरे पंजाब में अब तक शक्ति केंद्र प्रमुख ही नहीं बन पाए हैं। करीब पांच बूथों पर पार्टी ने एक शक्ति केंद्र बनाया है। बहुत से जिलों में फर्जी नियुक्ति करके ब्योरा प्रदेश नेतृत्व को भेज दिया गया है। इसके बाद बूथ प्रमुख बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। उसमें भी काफी समय लगेगा। पार्टी ने गुजरात, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में पन्ना प्रमुख और अर्ध पन्ना प्रमुख को सफलतापूर्वक आजमाया है। पन्ना प्रमुख वोटर लिस्ट के एक पन्ने में शामिल घरों तक सीमित होता है। अर्ध पन्ना प्रमुख के पास आधे पेज के लोगों की जिम्मेदारी होती है। मतदान के समय इनकी भूमिका पार्टी केलिए काफी अहम है।
पड़ोसी राज्यों हरियाणा, हिमाचल प्रदेश में इस स्तर तक ढांचा बना हुआ है। लेकिन पंजाब में अब तक इनका कुछ पता नहीं है। इतना ही नहीं, निचले स्तर पर संगठन बनाने में भी पार्टी का फोकस अपने कोटे की तीन सीटों अमृतसर, होशियारपुर, गुरदासपुर पर ही है। मालवा के जिले तो काफी पीछे हैं।