लोक अदालत ने बिरला सन लाइफ इंश्योरेंस के खिलाफ फैसला सुनाया। अदालत ने कंपनी को सेवाओं में कोताही का दोषी करार दिया है। साथ ही कंपनी को उपभोक्ता के रहते 56738 रुपये नौ प्रतिशत ब्याज के साथ वापस करने के आदेश दिए हैं। साथ ही कानूनी खर्च के रूप में कंपनी को 20 हजार रुपये चुकाने होंगे। वहीं, यदि कंपनी की तरफ से एक महीने में अदायगी नहीं की गई तो इंश्योरेंस कंपनी को पूरी रकम पर 12 फीसदी ब्याज चुकाना होगा। यह फैसला जज जगरूप सिंह महल की अदालत ने सुनाया है।
अदालत में इस संबंधी केस जिला रोपड़ निवासी नाजर सिंह और कुलवीर कौर ने दायर किया था। उन्होंने अदालत में दायर याचिका में बताया कि उन्होंने बिरला सन लाइफ इंश्योरेंस से एक पॉलिसी खरीदी थी। जिस समय पॉलिसी करवाई थी उस समय उन्हें कहा गया था कि उन्हें दो साल का प्रीमियम देना होगा। जिसमें प्रत्येक को एक लाख रुपये भरने होंगे। वहीं, चार साल बादल उन्हें दोगुनी रकम मिलेगी। उन्होंने कंपनी की बातों में आकर रकम जमा करवा दी।
चार साल बाद उन्होंने कंपनी को कहा कि उन्हें दोगुनी राशि वापस की जाए। लेकिन कंपनी ने ऐसा नहीं किया। इसके बाद कंपनी ने केवल उन्हें 142512 की अदायगी की। फिर उन्होंने इस संबंधी परमानेंट लोक अदालत में केस दायर किया था। इसके बाद अदालत की तरफ से कंपनी को नोटिस जारी किया। कंपनी के प्रबंधकों ने अदालत में पेश होकर कहा कि जो शिकायकर्ता शर्ते बता रहे हैं। ऐसी किसी भी तरह की कोई शर्त नहीं थी।
वहीं, कंपनी ने बताया कि शिकायकर्ता के पास पॉलिसी सबंधी दस्तावेज आने के बाद पंद्रह दिन के भीतर उसे कैंसिल करने का अधिकार थी। लेकिन ऐसा भी कंपनी की तरफ से नहीं किया गया। इसके बाद अदालत ने मेरिट के आधार पर केस को सुलझाने का प्रयास किया। लेकिन बाद नहीं बन पाई। जिसके बाद अदलत ने कहा कि कंपनी की तरफ से कोई ऐसे दस्तावेज नहीं भेजे गए थे। जो कि उन्हें भेजे गए हो। ऐसे में शिकातकर्ता को अभी भी पूरा अधिकार है कि वह पॉलिसी कैंसिल कर दे।