जौनपुर के लिए पत्नी और बेटे संग निकला प्रवासी
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पंजाब के नवां शहर से पत्नी और 10 वर्षीय बेटे के साथ जौनपुर के लिए साइकिल से निकला प्रवासी मजदूर तीन दिन का सफर कर सोमवार को अंबाला पहुंचा। चिलचिलाती धूप में भूख से तड़पता परिवार पानी के सहारे तीन दिनों तक पेट की आग बुझाता रहा, लेकिन 10 साल का मासूम जब भूख से तड़प उठा तो मजबूरी में पिता ने कबाड़ी को 200 रुपये में साइकिल बेच दी और बेटे को खाना खिलाया।
प्रशासन की ओर से तमाम प्रयास के बाद भी मजदूरों को पैदल और साइकिलों से पलायन जारी है। काम बंद होने और पैसे खत्म होने पर प्रवासी मजदूर अपने घरों की ओर कूच कर रहे है। जौनपुर के महेंद्र भी इन्हीं प्रवासी मजदूरों में से एक हैं जो तीन दिन तक साइकिल चलाकर पत्नी और बेटे को लेकर अंबाला पहुंचे थे। तीन दिनों से पूरे परिवार को खाने के लिए कुछ भी नसीब नहीं हुआ।
मां-बाप तो जैसे-तैसे भूख को दबाए रहे, लेकिन तीसरे दिन 10 वर्षीय मासूम भूख से तड़प उठा। असहाय मां-बाप ने पहले तो पानी से मासूम की भूख मिटानी चाही, लेकिन जब मासूम इसके लिए तैयार नहीं हुआ और खाने की जिद पर अड़ा रहा तो मजबूरी में पिता ने उस सवारी को ही बेच डाला जिस पर वह लुधियाना से अंबाला तक का सफर तय करके आए थे।