शुक्रिया हिन्दुतान! लॉकडाउन के दौरान हमारा बहुत अच्छे ढंग से ध्यान रखा गया। परेशानी तो थी, लेकिन कोरोना से बचाव के लिए यही एक दवा थी। परिवार से दूर रहने की पीड़ा तो भीतर तक झकझोर रही थी, लेकिन जैसे लोगों ने पाकिस्तानियों की खिदमत की है, उसके लिए शुक्रिया। लगभग 25 दिन तक अमृतसर की ऐतिहासिक खेरूद्दीन मस्जिद में ठहरने के बाद पाकिस्तान लौट रहे कराची निवासी मंसूर अली खान ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि जितने दिन भी मस्जिद में ठहरे, यह महसूस नहीं होने दिया गया कि वह पाकिस्तान से हैं। मुम्बई में रिश्तेदारों को मिलने के लिए आए मंसूर अली खान ने बताया कि वह अपने तीन साथियों के साथ पाकिस्तान जाने के लिए 21 मार्च को अमृतसर पहुंचे थे। सुबह उन्होंने पाकिस्तान जाना था लेकिन लॉकडाउन लागू होने से वह यहां फंस गए। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, मुम्बई और पंजाब के कई शहरों में लॉक डाउन के कारण फंसे 41 पाकिस्तानियों को वीरवार को अटारी सड़क सीमा के रास्ते उनके वतन रवाना कर दिया गया।
पाकिस्तान रवाना करने से पहले अटारी सड़क सीमा पर तैनात मेडिकल टीम के सदस्यों ने उनकी थर्मल स्क्रीनिंग की। जांच के बाद बीएसएफ ने सभी को पाकिस्तानी रेंजर अधिकारियों को सौंप दिया। पाकिस्तान जाने वाले सभी नागरिकों के चेहरों में संतुष्टि के भाव थे। अंगुलियों से विक्ट्री का निशान बनाते हुए उत्तरप्रदेश से आई समीना ने बताया कि वह अपने बीमार भाई को देखने के लिए भारत आई थी। उनका वीजा की अवधि खत्म हो गई थी। दोनों देशों की सरकारों ने इंटरनेशनल गेट खोलने का फैसला लिया है।
कराची से आए मोहम्मद हुसैन ने कहा कि वह अपने परिवार के साथ मुंबई में उर्स में शामिल होने के लिए आए थे लेकिन लॉकडाउन के कारण फंस गए थे। कराची के विलायत अली अपनी बेटी की प्लास्टिक सर्जरी करवाने के लिए दिल्ली आए थे। घर वापसी की खुशी उनके चेहरे पर थी।