कोरोना महामारी के चलते देशभर में लागू लॉकडाउन के बीच चंडीगढ़ में फंसे दूसरे राज्यों के प्रवासी लोगों को उनके गृह राज्य भेजने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके लिए चंडीगढ़ और मोहाली से स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। इसी कड़ी में रविवार शाम पौने सात बजे चंडीगढ़ से गोंडा (उत्तर प्रदेश) के लिए पहली श्रमिक स्पेशल ट्रेन रवाना की गई।
इस ट्रेन में कुल 1188 प्रवासी सवार होकर अपने घर के लिए रवाना हुए। ट्रेन से रवाना होने से पहले इन प्रवासियों का चंडीगढ़ में सेक्टर-43 बस अड्डे पर बाकायदा मेडिकल जांच की गई। उसके बाद बस के माध्यम से बारी-बारी सबको चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पहुंचाया गया। ट्रेन अपने निर्धारित समय से एक घंटे की देरी से रवाना हुई।
ट्रेन में एक कोच में 72 सीटें होती हैं, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के लिए 72 के बजाय 50 सीटों पर प्रवासियों को बैठाया गया। एक सीट पर दो यात्री सवार थे। कुल 24 कोचों वाली इस ट्रेन में कुल 1188 प्रवासी सवार होकर चंडीगढ से रवाना हुए। यहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी।
ट्रेन शाम 6 बजे होनी थी रवाना, सुबह 8 बजे ही भीगते हुए पहुंच गए मजदूर
ट्रेन में बैठने से पहले सभी 1188 प्रवासियों की आईएसबीटी-43 में स्वास्थ्य जांच की गई। इसके बाद ट्रेन टिकट देकर बसों के जरिए रेलवे स्टेशन पहुंचाया गया। प्रशासन ने सभी प्रवासी मजदूरों को सबसे पहले आईएसबीटी-43 और कलाग्राम में स्वास्थ्य जांच के लिए बुलाया था लेकिन रविवार सुबह आंधी और बारिश के चलते कलाग्राम में प्रशासन की तरफ से बनाई गई व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई। शनिवार रात यहां लगाए गए टेंट पूरी तरह उखड़ कर गिर गए। इसके बाद सभी प्रवासी मजदूरों को आईएसबीटी-43 ले जाया गया।
जहां पर मजदूरों को दोपहर 12 बजे आमंत्रित किया गया था, लेकिन मजदूर सुबह 8 बजे से ही बारिश में भीगते हुए पहुंचने शुरू हो गए थे। आईएसबीटी पर सभी प्रवासियों के मोबाइल में आए मैसेज को देखा गया, जिन्होंने प्रशासन की वेबसाइट व हेल्पलाइन नंबर पर अपना रजिस्ट्रेशन करवाया था। यहां पर बार-बार घोषणा की जाती रही कि सिर्फ उन्हीं मजदूरों को जाने दिया जाएगा, जिन्होंने गोंडा जाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। ऐसे में कई मजदूरों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा।
एक बस में 27 मजदूरों को बिठाकर स्टेशन भेजा
आईएसबीटी-43 पर सभी मजदूरों का स्वास्थ्य जांचा गया। इसके लिए अस्पतालों से डॉक्टरों की टीम पहुंची थी। थर्मल स्कैनिंग करने के बाद स्वस्थ पाए जाने के बाद सभी मजदूरों को ट्रेन का टिकट दिया गया और फिर बस में बैठाया गया। टिकट के पैसे किसी भी प्रवासी से नहीं लिए गए। यहां पर सभी मजदूरों को दोपहर का खाना दिया गया।
इसके बाद एक बस में 27 मजदूरों को बैठाकर रेलवे स्टेशन पहुंचाया गया। जहां से वह अपने अपने घर के लिए रवाना हुए। आईएसबीटी पर पूरी तैयारियों की व्यवस्था में प्रशासन की फौज लगी हुई थी। इसमें मुख्य तौर पर चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के सीईओ यशपाल गर्ग, राकेश पोपली, हाउसिंग बोर्ड के चीफ इंजीनियर राजीव सिंग्ला समेत चंडीगढ़ पुलिस के तमाम अधिकारी भी डटे रहे।
मोबाइल पर मैसेज आया फिर भी वापस लौटाया
आईएसबीटी-43 पर कई मजदूरों को निराश होकर घर भी लौटना पड़ा। अधिकारियों के मुताबिक, सिर्फ उन्हीं मजदूरों को वापस भेजा गया, जिन्होंने चंडीगढ़ की वेबसाइट पर गोंडा की बजाय अन्य जिलों के लिए आवेदन किया था लेकिन ट्रेन चलने की खबर सुनकर वह रविवार को आईएसबीटी-43 पहुंच गए थे। अधिकारियों के इन दावों के बीच अमर उजाला को गोंडा के 20 वर्षीय हरिशंकर और 18 वर्षीय मलखान यादव मिले।
उन्होंने अपने मोबाइल में चंडीगढ़ प्रशासन की तरफ से भेजा गया मैसेज दिखाया और बताया कि उन्हें गोंडा ही जाना है। इसके लिए उन्होंने रजिस्ट्रेशन भी कराया था। मोबाइल पर मैसेज भी आया है और शनिवार रात चंडीगढ़ प्रशासन की तरफ से फोन भी आया था। इसके बाद ही वह यहां पहुंचे हैं, लेकिन पुलिस कर्मियों ने उन्हें वापस भेज दिया और कोई सुनने को भी तैयार नहीं है।