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मनीष तिवारी बोले- इंडियन ओवरसीज कांग्रेस करेगी विदेश में फंसे भारतीयों की मदद, संपर्क करें

Mon, 25 May 2020 01:11 PM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
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कांग्रेस नेता मनीष तिवारी - फोटो : ANI
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श्री आनंदपुर साहिब से कांग्रेस के लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने रविवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग से इंडियन ओवरसीज कांग्रेस की वैश्विक सभा को संबोधित किया। इसमें 51 देशों के 109 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। तिवारी ने कहा कि आईओसी के प्रधानों को संबंधित देशों में भारतीय दूतावासों या काउंसलेटों से उन व्यक्तियों की सूची हासिल करने को कहा, जो वहां फंसे हुए हैं और भारत लौटना चाहते हैं।
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उन्होंने कहा कि आईओसी को अन्य भारतीय संस्थाओं के साथ मिलकर इन्हें वापस लाने के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करनी चाहिए, क्योंकि कई लोग भोजन और नगदी के संकट का सामना कर रहे हैं। वीडियो कांफ्रेंस में इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के चेयरमैन सैम पित्रोदा, आईओसी यूएसए के प्रधान मोहिंदर सिंह गिलजियां, आईओसी यूएस पंजाब चैप्टर के प्रधान गुरमीत गिल, आईओसी कनाडा के प्रधान अमरप्रीत औलख और पंजाब लार्ज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बोर्ड के चेयरमैन पवन दीवान भी शामिल हुए।

इस कांफ्रेंस का उद्देश्य ओवरसीज कांग्रेस के सदस्यों से इस बात पर चर्चा करना था कि अन्य देशों की सरकारों द्वारा कोविड-19 से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। मनीष तिवारी ने बैठक में कहा कि महामारी ने आईओसी जैसी संस्था को अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मार्ग दिखाने का बड़ा मौका दिया है, जबकि मौजूदा दौर में ग्लोबल गवर्नेंस की सभी संस्थाएं लगभग ध्वस्त हो चुकी हैं। तिवारी ने कहा कि विश्व समुदाय के एकजुट होकर कोविड-19 के पैदा होने की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच करने में असफल रहा है।
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उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत डब्ल्यूएचओ के कार्यकारी बोर्ड की प्रधानगी का इस्तेमाल देशों और संगठनों के अंतरराष्ट्रीय गठजोड़ को एकजुट रखने में करेगा, ताकि चीन को अंतरराष्ट्रीय निष्पक्ष टीम को कोविड-19 की तह तक जाने में जांच के लिए मजबूर किया जा सका और इसका पता लगाया जाए कि कोविड-19 प्राकृतिक प्रजाति का नतीजा था या यह लैब की पैदावार। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ द्वारा जनवरी 2020 में समय रहते चेतावनी जारी करने में असफल रहना और यहां तक कि महामारी को वायरस का नाम देने में भी चीन के आगे घुटने टेकना, एक बड़ा पतन है।

इसी तरह, जब मार्च में यह महामारी पूरी दुनिया में फैल रही थी, यूनाइटेड नेशनंस सिक्योरिटी काउंसिल (यूएनएससी) को 21वीं सदी के अब तक के सबसे बड़े संकट पर चर्चा करने की इजाजत नहीं मिली क्योंकि चीन ने इसमें सीधा हस्तक्षेप किया।
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