सर्दी से बेफिक्र लेखकों ने पूरे जोश के साथ अपने अनुभवों और किताब के पन्नों पर अंकित भावनाओं को अपने अंदाज में बयां किया। कुछ कॉरपोरेट जगत से तो कई ऐसे भी जो फिल्म लेखन में अपना हुनर दिखा चुके हैं, सभी की मौजूदगी में रविवार को पंचकूला लिट फेस्ट (पीएलएफ) संपन्न हो गया।
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सेक्टर-चार के सतलुज पब्लिक स्कूल में विधायक ज्ञानचंद गुप्ता बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे जबकि नीलम मान सिंह, सविता भट्टी सहित कई गणमान्य इस मौके का गवाह बने।
साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों को संबोधित करते हुए विधायक ने कहा कि यह देखकर काफी अच्छा लगता है कि पंचकूला में इस स्तर के साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश के अलग-अलग प्रदेशों से लेखक शामिल हुए।
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उन्होंने कहा कि युवा जो हमारे देश का भविष्य हैं, उन्हें भी ऐसे आयोजनों के दौरान काफी कुछ सीखने का मौका मिलता है। इस मौके पर मौजूद सविता भट्टी ने कहा कि मौजूदा सूचना तकनीकी दौर में हर क्षेत्र में नई घटनाएं घटित हो रही है।
ऐसे में किताबें ही हैं जो तमाम इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की तुलना में अधिक आकर्षित करने में सक्षम हैं। किताबें सबसे अच्छे दोस्त हैं, जिसे सभी को अपनाना चाहिए।
राजनीतिकरण के मुद्दे पर बेबाक बोले लेखक
इस दौरान पद्मश्री रंगकर्मी नीलम मान सिंह ने सुदीप सेन की नई किताब फ्रैक्टिकल्स का विमोचन किया। सुदीप ने देश में कविता के मौजूदा हालात पर कहा कि कविता साहित्य की सबसे उच्च धारा है, जिसमें जिंदगी के सभी पहलू शामिल होते हैं। इस मौके पर ‘राजनीतिकरण : क्या हमें अपने नेताओं को धर्म, शिक्षा और लिंग के आधार पर चुनना चाहिए?’,
विषय पर एक गहन विचार भी साझा किए गए। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता अनुराग आनंद ने की। पेनलिस्टों में फिल्म निर्माता रमेश मेनन और लेखिका मेघा रामास्वामी, आईआईएम बंगलूरू के प्रोफेसर एवं लेखक राकेश गोधवानी शामिल थे।
सभी पेनलिस्ट इस बात पर सहमत थे कि राजनीति में कोई निष्पक्ष प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है और ये सिर्फ दौलत की ताकत है जो कि राजनीतिक के प्रभावशाली पहलुओं को नजरअंदाज कर रही है।
मेनन ने जोर देकर कहा कि हमें अपनी आवाज को निडर होकर बुलंद करना होगा और हर स्तर पर इसे संभव बनाना होगा। इसके साथ ही हमें अपना कोई भी विचार तय करने से पहले अपने नेताओं के चरित्र का एक स्पष्ट नक्शा भी खींचना होगा।
इस मौके पर मौजूद सतलुज पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल कृत सेराय ने कहा कि हमारा प्रयास है कि पंचकूला को देश के साहित्य के नक्शे पर लाया जाए। इस पौधे को फल लगने शुरू हो गए हैं जिसे अगली बार और संवारा जाएगा।
एसिड अटैक मुद्दे पर बोली मेघना रामास्वामी
मेघना रामास्वामी ने कहा कि एसिड अटैक करने वालों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा करना बलात्कार से कम नहीं है और समाज को इस दिशा में जागरूकता के लिए अभियान चलाना चाहिए।
अपनी फिल्म न्यू बॉर्न का जिक्र करते हुए मेघना ने कहा कि इसमें महिलाओं और युवतियों के जीवन के उन पहलुओं को दिखाया गया है, जिसे महसूस किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि मैंने उनके साथ वक्त बिताया है जिन्हें समाज ने ही ऐसा दर्द दिया है, जिसे ताउम्र नहीं भुलाया जा सकता है। बकौल मेघना एसिड अटैक बेहद संगीन जुर्म है, ऐसी वारदातों को अंजाम देने वालों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।
मुंबई की एक घटना का जिक्र करते हुए मेघना ने कहा कि इस बात ने उन्हें इस कदर झकझोर दिया है कि एसिड अटैक पर आधारित स्क्रीन प्ले को तैयार किया।
उन्होंने कहा कि रोजाना एक-दो घटनाएं देश भर में होती हैं, जिनमें से कुछ की रिपोर्ट नहीं भी होती। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को केवल प्यार चाहिए और कुछ नहीं।
गर्भपात के बारे में मेघना ने अपनी राय जाहिर करते हुए कहा कि इसके लिए महिलाओं को छूट मिलनी चाहिए। लेकिन, कन्या भ्रूण हत्या की प्रथा को खत्म किया जाना इससे भी अधिक जरूरी है। बच्चों को खुद का सबसे चहेता वर्ग बताते हुए उन्होंने कहा कि अगली किताब और फिल्म बच्चों के लिए ही होगी।
साहित्यिक उत्सव के समापन के मौके पर पैनल डिस्कशन, किताबों का विमोचन और जाने माने लेखकों का साहित्यिक संवाद भी हुआ। बीच संवाद आदि प्रमुख हैं।
इस मौके पर मेघना रामास्वामी की अवॉर्ड प्राप्त फिल्म न्यूबोर्न को भी दिखाया गया, जो तेजाब के हमलों से बचने वाली बहादुर लड़कियों की जिंदगी पर आधारित हैं।
इस दौरान अवार्ड विजेता जसराज भट्टी की डॉक्यूमेंट्री की भी स्क्रीनिंग की गई। फेस्ट में ट्राईसिटी के स्कूली स्टूडेंट्स ने भी बुक रीडिंग और राइटिंग में अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित किया।
तीन किताबों का हुआ विमोचन -विश धमीजा की भेंडी बाजार को लेखिका ताहिरा कश्यप ने लॉन्च किया। -राकेश गोधवानी की किताब ‘व्हाट टू एंड व्हेन शट अप’ का विमोचन हुआ। -सुदीप सेन की नई किताब फ्रैक्टिकल्स का भी विमोचन किया गया।