ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 20 दिन से नेशनल पार्क से तेंदुओं और हाथियों की लगातार हाइवे की तरफ मूवमेंट हो रही थी। दरअसल भीषण गर्मी के चलते जंगल के अंदर बनाएं गए होद, गजलर और तालाब सूख गए हैं।
जंगली जानवर अपनी प्यास बुझाने के लिए यमुना की तरफ आते हैं। कई बार रिहायशी क्षेत्र में भी इनकी मूवमेंट देखी गई थी। अमर उजाला ने कई बार इस तरह की जानकारी प्रमुखता से प्रकाशित की। इसके बावजूद अधिकारियों की नींद नहीं टूटी और एक तेंदुए को अपनी जान गंवानी पड़ी।
पशु चिकित्सक डॉ. नंद किशोर सास्वत ने बताया कि मादा तेंदुए की लंबाई लगभग पांच फुट थी और उसके सिर के ऊपर से किसी बड़े वाहन का टायर चढ़ा हुआ था। जिसकी वजह से उसकी गर्दन टूट गई और जबड़ा भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। इसी वजह से उसकी मौत हुई है। तेंदुए पोस्टमार्टम करवा कर दफना दिया गया है।
-देर रात सूचना मिली थी कि कलेसर रेस्ट हादस के पास किसी वाहन की टक्कर से तेंदुआ जख्मी हालत में पड़ा है। हमारी टीम वहां पहुंची, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। प्रतापनगर थाना पुलिस में अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा दी गई है। -राजेश चहल, वाइल्ड लाइफ इंस्पेक्टर