फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Haryana Panchayat Election: समय पर नहीं हुए थे पिछले दो चुनाव, शैक्षणिक योग्यता और आरक्षण के कारण हुई थी देरी

Sat, 08 Oct 2022 01:53 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पूर्व चौटाला सरकार वर्ष 2003 में हरियाणा पंचायती राज कानून, 1994 में संशोधन कर यह व्यवस्था कर चुकी है कि चुनाव की घोषणा से पूर्व सरकार की अनुमति लेना जरूरी है। इस कारण भी एक-दो महीने प्रक्रिया पूरी करने में लग जाते हैं।
विज्ञापन
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल। - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हरियाणा में बीते दोनों पंचायत चुनाव समय पर नहीं हुए। इससे पहले ये चुनाव तय अवधि में कराए जाते रहे। भाजपा के सत्ता में आने के बाद पंचायती राज प्रणाली में सुधारों का दौर शुरू हुआ। 2015 अप्रैल में पंचायत चुनाव तय थे, लेकिन सरकार ने पंच से जिला परिषद तक शैक्षणिक योग्यता तय कर दी। प्रदेश में इसका जोरदार विरोध हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा।

विज्ञापन


आखिर में जीत सरकार की हुई और तय शैक्षणिक योग्यता अनुसार ही जनवरी 2016 में चुनाव हुए। इस कारण नौ महीने की देरी हुई। इसके बाद फरवरी 2021 में पंचायत चुनाव तय थे। लेकिन, महिलाओं को 50 फीसदी सीटें और बीसी-ए को आरक्षण ने रोड़ा अटका दिया। मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने नए नियमों के अनुसार चुनाव कराने के आदेश जारी कर दिए। मामला अभी विचाराधीन है, चुनावों परिणामों का भविष्य अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा। बीसी-ए को सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों पर आरक्षण मिल चुका है।

सीटें आरक्षित करने, नई पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषद की वार्डबंदी के कारण भी चुनाव घोषणा में देरी हुई। 21 महीनों की देरी के बाद अब अक्तूबर 2022 में चुनाव होने जा रहे हैं। एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि पूर्व चौटाला सरकार वर्ष 2003 में हरियाणा पंचायती राज कानून, 1994 में संशोधन कर यह व्यवस्था कर चुकी है कि चुनाव की घोषणा से पूर्व सरकार की अनुमति लेना जरूरी है। इस कारण भी एक-दो महीने प्रक्रिया पूरी करने में लग जाते हैं। भारतीय चुनाव आयोग की तरह राज्य चुनाव आयोग को अपने स्तर पर चुनाव की घोषणा का अधिकार होना चाहिए।

अलग-अलग तारीख से वोटिंग गिरने का खतरा

हरियाणा में दो चरणों में चुनाव के अलावा पहले चरण में पंचायत समिति-जिला परिषद और सरपंच-पंच के लिए मतदान अलग-अलग तारीख को होने के कारण मतदान प्रतिशत गिरने का खतरा है। चार दिन के भीतर दो बार वोट डालने के लिए कितने लोग निकलते हैं, यह देखना होगा। गांवों में सरपंच पद के लिए ही वोट डालने का क्रेज लोगों में रहता है। वैसे भी इन दिनों फसल कटाई और त्योहार का सीजन है। चुनाव आयोग के लिए मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं रहेगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें