शहीद की अंतिम यात्रा में उमड़ा जन सैलाब।
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देश की सरहद पर तैनात बसी अकबरपुर के जवान दीवान चंद ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए। दीवान चंद सियाचिन की सेकेंड ग्लेशियर की पोस्ट पर ड्यूटी दे रहे थे। ऑक्सीजन लेवल कम होने की वजह से शुक्रवार सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी। साथी जवानों ने उन्हें बेस कैंप में भर्ती करवाया। जहां शुक्रवार देर शाम जवान ने दम तोड़ दिया। तीन दिन बाद सोमवार को शहीद जवान का पार्थिव शरीर उसके पैतृक गांव बसी अकबरपुर पहुंचा। जहां राजकीय सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया गया।
दीवान चंद (45) पुत्र वीरभान सिंह 1997 में बरेली में रंगरूट भर्ती हुए थे। ट्रेनिंग के बाद जाट रेजिमेंट के जवान दीवान चंद ने मुरादाबाद में ड्यूटी दी। करीब डेढ़ वर्ष पहले उनकी पोस्टिंग सियाचिन में हुई थी। सेना अधिकारियों के मुताबिक 28 अगस्त की सुबह जवान दीवान चंद की अचानक तबीयत बिगड़ गई।
हेलीकॉप्टर के माध्यम से बेस कैंप भेजा गया। शुक्रवार शाम को सूबेदार जोगीराम ने शहीद दीवान चंद के परिजनों को सूचना दी। जिसके बाद घर में मातम छा गया। सोमवार को ढाई बजे शहीद का शव जैसे ही घरौंडा पहुंचा गांव के युवाओं का बाइक काफिला हाथों में तिरंगा लिए घरौंडा पहुंच गया। शहीद की गाड़ी के आगे व पीछे सैकड़ों बाइकों का काफिला भारत माता व शहीद दीवान चंद अमर रहे के नारे लगाते हुए चल रहे थे।
शहीद के भाई को तिरंगा सौंपते सेना का जवान।
शहीद की शहादत को नमन करने पूरा गांव उमड़ पड़ा। युवा, बुजुर्ग, महिला व बच्चे घरों की छतों, गलियों और चौबारों पर खड़े होकर सलामी दे रहे थे। शहीद की पत्नी रेशमा, 13 वर्षीय मोहित तथा 10 वर्षीय हिमांशु का रो-रोकर बुरा हाल था।
गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम संस्कार
गांव के श्मशान घाट में अंबाला से पहुंचे सेना पुलिस के जवानों ने इंस्पेक्टर विक्रम जीत सिंह और डीएसपी रामदत के नेतृत्व में हरियाणा पुलिस के जवानों ने शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। मौके पर पहुंची एसडीएम डॉ. पूजा भारती, डीएसपी रामदत, नायब तहसीलदार सुमन लता, बीडीपीओ गुरीन कौर, एसएचओ कंवर पाल, कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव वीरेंद्र सिंह राठौर व अन्य ने शहीद को नमन किया। मुखाग्नि जवान के बड़े भाई ज्ञानचंद ने दी। जिसके बाद सेना के जवानों ने ज्ञानचंद को तिरंगा सौंपा।