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Parkash Singh Badal: गृहमंत्री अमित शाह ने प्रकाश सिंह बादल को बताया अजातशत्रु, कहा-उनका जाना बड़ी क्षति

Thu, 04 May 2023 02:38 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, बादल/मुक्तसर (पंजाब)

सार

प्रकाश सिंह बादल पांच बार पंजाब के सीएम रहे। उनका मोहाली के अस्पताल में देहांत हो गया था। बुधवार को कीरतपुर साहिब में उनका अस्थि विसर्जन किया गया था। अंतिम अरदास के दौरान वक्ताओं ने पूर्व सीएम के जीवन पर चर्चा करते हुए उन्हें याद किया। सुखबीर बादल एवं हरसिमरत कौर बादल ने सभी दिग्गजों व लोगों का आभार व्यक्त किया।
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प्रकाश सिंह बादल की अंतिम अरदास में पहुंचे गृहमंत्री अमित शाह और डेरा ब्यास मुखी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
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पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल नमित अंतिम अरदास एवं श्रद्धांजलि समागम में केंद्र से गृह मंत्री अमित शाह सहित विभिन्न राज्यों के मौजूदा व पूर्व मंत्रियों सहित हजारों लोग पहुंचे और बादल को श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। 
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इस दौरान अपने संबोधन में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि पूर्व सीएम बादल के निधन से सिर्फ पंजाब ही नहीं समग्र देश की राजनीति व सामाजिक नीति क्षेत्र को कभी न पूर्ण होने वाला घाटा हुआ है। बादल के निधन से जो शून्यता पैदा हुई है वो लंबे अरसे तक नहीं भरी जा सकेगी। बादल के जाने से सिख पंथ ने सच्चा सिपाही खो दिया है। देश ने देशभक्त खो दिया है। किसानों ने सच्चा हमदर्द खो दिया है। 

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शाह ने कहा कि इतना लंबा सार्वजनिक जीवन जीने के बाद कोई दुश्मन न हो, ऐसा अजातशत्रु जीवन बादल के अलावा किसी ने नहीं जिया होगा। अमित शाह ने कहा कि वे जब भी बादल से मिलते थे, कुछ न कुछ नया सीखते थे। दल तो उनके अलग-अलग थे, मगर वे राजनीतिक जीवन में अच्छी सलाह देते थे, जो महामानव के सिवाए कोई नहीं दे सकता था। वे पारदर्शिता के साथ हर सलाह देते थे। 

बादल हमेशा भाईचारक सांझ मजबूत करने में जुटे रहे
प्रकाश सिंह बादल के जाने के बाद से भाईचारे का सरदार चला गया। बादल ने पूरा जीवन हिंदू-सिख एकता को समर्पित कर दिया था। राजनीति में विरोधों के बावजूद भाईचारक सांझ मजबूत करने में जुटे रहे। सुखबीर बादल बता रहे थे कि गांव बादल में मंदिर, मस्जिद व गुरुद्वारा भी बादल का बनवाया हुआ है। ऐसा व्यक्ति कहीं नहीं मिलेगा। देश के लिए खड़ा होने का मौका आया तो बादल ने पीठ नहीं दिखाई। इमरजेंसी के खिलाफ भी बादल चट्टान की तरह खड़े रहे। वे बेहद छोटे थे, लेकिन उन्होंने अपने बड़े बुजुर्गों से ऐसा सुना था। बादल का जाना समूचे देश के लिए बहुत बड़ी क्षति है। सिर्फ बादल परिवार के लिए नहीं बल्कि देश के लिए अपूर्णीय क्षती है। उन्होंने बादल के जीवन से सभी को प्रेरणा लेने को कहा।



कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच सुबह दस बजे से बाद दोपहर करीब तीन बजे तक चले इस श्रद्धांजलि समागम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री सोम प्रकाश, पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना, पूर्व राज्यसभा सदस्य बलविंदर भुंदड़, हरियाणा के पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला, बसपा प्रदेश अध्यक्ष जसबीर सिंह गढ़ी, पूर्व अध्यक्ष अवतार सिंह करीमपुरी, डेरा राधा स्वामी ब्यास प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों, एसजीपीसी अध्यक्ष एजवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह, सचखंड श्री दरबार साहिब के मुख्य ग्रंथी जगतार सिंह, असम से एजीपी के अध्यक्ष अब्दुल वोहरा समेत अनेकों दिग्गज मौजूद रहे। 



समागम से पहले सुबह बादल निवास पर चल रहे पाठ का भोग डाला गया। रस्म पगड़ी की रस्म करते हुए सुखबीर सिंह बादल को पगड़ी पहनाई गई। उसके बाद समागम में रागी सिंहों ने कीर्तन किया। बारह बजे अरदास हुई। अरदास के बाद दिग्गजों ने बादल को भाव-भीनी श्रद्धांजलि भेंट की।



वक्ताओं ने पूर्व सीएम के जीवन पर चर्चा करते हुए उन्हें याद किया। पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने बादल परिवार की ओर से आए सभी दिग्गजों व आम लोगों का आभार व्यक्त किया। इस मौके पारिवारिक सदस्यों की ओर से पूर्व वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल, पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया भी मौजूद थे। मंच संचालन पूर्व शिक्षा मंत्री एवं शिअद के मुख्य प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने किया।
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बादल के विचारों को आगे ले जाना ही सच्ची श्रद्धांजलि: ओम बिरला
पूर्व मुख्यमंत्री के श्रद्धांजलि समागम में पहुंचे विभिन्न दलों के नेताओं ने उन्हें याद करते हुए सभी को खासकर युवाओं को बादल के जीवन से प्रेरणा लेने की बात पर जोर दिया। लोक सभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि बादल सरपंची से सियासी सफर शुरु करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे। उन्होंने पंजाब के आम लोगों व किसानों के लिए लंबा संघर्ष किया। सियासी जीवन में संघर्ष के कारण सबसे ज्यादा जेलें काटीं। उनके विचारों को आगे लेकर जाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।

पंजाब के हितों खातिर हमेशा केंद्र में उठाई आवाज: गढ़ी
बसपा के प्रदेश अध्यक्ष जसबीर सिंह गढ़ी ने कहा कि पंजाब के हितों को केंद्र में उठाने वाले नेता थे प्रकाश सिंह बादल। पंजाब की राजधानी का मुद्दा केंद्र के समक्ष उठाने वाले बादल ही थे। सूबे, पंथ की बात करने वाले बादल ही थे। गढ़ी ने समागम दौरान गृह मंत्री अमित शाह समक्ष ही बादल द्वारा केंद्र के खिलाफ पंजाब के हितों खातिर उठाई गई आवाज संबंधी जिक्र किया।

बादल के जीवन से सीखें ये तीन अनुशासन: हरदेव अर्शी
सीपीआई पंजाब के वरिष्ठ नेता पूर्व विधायक कामरेड हरदेव अर्शी ने कहा कि बादल एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक संस्था थे। बादल गुणों के भंडार थे। सहनशीलता का समुद्र थे। उनका ह्दय विशाल था। उन्होंने बादल के जीवन से हमेशा तीन बातें सीखने की बात पर जोर दिया। हरदेव अर्शी ने कहा कि बादल समय के पाबंद थे। इतने सहनशील थे कि कभी गुस्सा नहीं होते थे। सियासी तौर पर कभी पक्षपात नहीं करते थे। बदलाखोरी की राजनीति नहीं करते थे।

वाजयेपी का प्रधानमंत्री बनना बादल की देन: सरना
दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने कहा कि बादल की बदौलत ही वाजपेयी प्रधानमंत्री बने थे। ये देन सिर्फ प्रकाश सिंह बादल की ही थी। बादल की देन को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

विपक्ष के लिए भी मन में नहीं रखते थे कड़वाहट: सचिन पायलट
कांग्रेस की ओर से राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि बादल साहिब के जीवन से सभी को सीखा है। सियासी जीवन में नेता ने क्या कमाया ये उसके जाने के बाद ही पता चलता है। बादल आजीवन अपने विचारों व सिद्धांतों पर अडिग रहे। बादल के जीवन से सभी को सीखना चाहिए। राजनीति में होते हुए बादल विपक्ष के लिए मन में कड़वाहट न रखने वाले नेता थे। सरदार साहिब व काका जी ये दो शब्द उनकी जुबां पर रहते थे। बादल साहिब का व्यक्तित्तव बेहद विराट था। वैचारिक विरोध के बावजूद वे हमेशा अपनेपन व आत्मीयता का संबंध बनाकर चलते थे।

ताऊ को याद कर भावुक हो उठे मनप्रीत बादल
पूर्व वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल अपने ताऊ प्रकाश सिंह बादल को याद कर भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि बादल हिंदू, सिख, मुस्लिम व क्रिश्चियन भाइचारे के लिए हमेशा डटने वाले नेता थे। आने वाली पीढ़ी बादल की अहसानमंद रहेगी। हलके के गांवों के लोग मूलभूत सहूलियतों से वंचित थे, मगर बादल ने हलके की नुहार ही बदल दी।

प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति सहित अनेकों ने भेजे शोक संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपित द्रौपदी मुर्मू, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविद, कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री एवं बसपा सुप्रीमो मायावती आदि ने शोक संदेश भेजे।
 
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