अधिग्रहण रद्द होने के बाद प्रशासन के हाथ से जमीन तो गई ही मुआवजे के रूप में दी गई रकम निकालने में भी पसीने छूट रहे हैं। मुआवजा दबाए बैठे किसानों को प्रशासन नोटिस पर नोटिस तो दे रहा है, लेकिन पैसे नहीं निकलवा पा रहा है। पिछले साल भर से नोटिस का सिलसिला चल रहा है।
बता दें कि प्रशासन ने जून 2006 और फरवरी 2007 में एक नोटिफिकेशन के बाद आईटी पार्क के फेज-3 के लिए 272 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अक्तूबर 2012 में इस जमीन का अधिग्रहण रद्द कर दिया था। ऐसे में प्रशासन को जमीन किसानों को वापस देनी पड़ी थी। अधिग्रहण के बाद प्रशासन बहुत से किसानों को करोड़ों की मुआवजा राशि दे चुका था, जिसे कई साल बीतने के बाद भी अभी तक किसानों ने लौटाया नहीं हैं। अब किसानों को प्रशासन ने चेताया है कि वह जल्द से जल्द जमीन का मुआवजा वापस करें।
हट की इजाजत, बना दिए फार्म हाउस
आईटी पार्क फेज-3 की जमीन का चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) भी नहीं हो सकता। प्रशासन यह साफ कर चुका है कि इस जमीन पर कृषि संबंधी गतिविधि के अलावा और कोई गतिविधि नहीं हो सकती।
कुछ किसानों ने प्रशासन से अपील की थी कि उन्हें फार्म हाउस में प्राइवेट पार्टियों और अन्य फंक्शन करने की इजाजत दी जाए, लेकिन प्रशासन इससे इनकार कर चुका है। इस जमीन पर केवल हट बनाई जा सकती हैं। उसके बावजूद कई लोग यहां कॉमर्शियल गतिविधियां कर रहे हैं। हट की जगह फार्म हाउस बना चुके हैं।
कोट्स...
मैं इसकी जांच करूंगा कि कितनी रकम बकाया है। अगर पैसे वापस नहीं किए गए हैं तो प्रशासन कानूनी कार्रवाई का सहारा लेगा।
प्रिंस धवन, भू-अधिग्रहण अधिकारी, चंडीगढ़।