प्रशासन के एक आदेश से मेयर, सोशल वेलफेयर सेक्रेटरी, डीसी और एसएसपी सहित अन्य आईएएस-आईपीएस अधिकारियों की लाल बत्ती उतर गई है। अब गिनी चुनी गाड़ियों पर ही लाल बत्ती दिखाई देगी। प्रशासन ने सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स के तहत सरकारी गाड़ियों पर बत्ती लगाने के संशोधित दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। चंडीगढ़ ही नहीं पंजाब और हरियाणा की गाड़ियों पर भी यह नए आदेश लागू होंगे। यूटी प्रशासन ने इसकी सूचना दोनों राज्यों को आधिकारिक तौर पर दे दी है। चंडीगढ़ की ज्यूरीडिक्शन में प्रवेश करते ही दोनों प्रदेशों के अधिकारियों को इन नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। अभी तक सभी सेक्रेटरी लेवल के अधिकारी और अन्य आईएएस लाल बत्ती वाली गाड़ी में ही चलते थे।
अब बत्ती की परमिशन का स्टीकर भी केवल ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी के पास आवेदन करने के बाद ही मिल सकेगी। जबकि स्टेट ट्रांसपोर्ट अथारिटी इसका पूरा रिकॉर्ड देखेगा। अभी तक पुलिस की तरफ से ही अधिकारियों को यह स्टीकर जारी किए जाते थे। नई नोटिफिकेशन जारी होते ही पहले से किसी भी अथॉरिटी द्वारा जारी सभी स्टीकर अवैध हो गए हैं। नए स्टीकर के लिए फ्रेश एप्लीकेशन ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी केके जिंदल के पास जमा करानी होगी।
इन आदेशों के बाद अब कोई भी अधिकारी मर्जी से लाल बत्ती नहीं लगा सकेंगे। अभी तक अधिकतर आईएएस लाल बत्ती लगी गाड़ी में ही चलते रहे हैं। नोटिफिकेशन में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि गाड़ी में अधिकारी नहीं होने पर बत्ती का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। बत्ती काले या सफेद कपड़े से कवर होनी चाहिए। हालांकि इस नोटिफिकेशन की भनक से पहले ही कुछ अधिकारियों ने अपनी लाल बत्ती हटाकर इसे एंबर में बदल लिया था।
एडवाइजर को लाल बत्ती, मेयर को नहीं
नोटिफिकेशन में एडवाइजर को लाल बत्ती लगाने की परमिशन है। जबकि शहर के पहले नागरिक मेयर को लाल बत्ती लगाने की मंजूरी नहीं है। अभी तक मेयर को भी लाल बत्ती लगाने की छूट रही है। लेकिन नई नोटिफिकेशन में इसे बदल दिया गया है।