फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh News: अक्षय तृतीया पर वर्षीतप पारणा महोत्सव 30 को

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। जैन परंपरा में अक्षय तृतीया को जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव जी से जोड़कर देखा जाता है। इसे आखा तीज भी कहते हैं। भगवान ऋषभदेव ने जब दीक्षा ली तो उन्हें आहार पानी इत्यादि क्या व कैसे देना है। इस विधि से उस समय के लोग अनजान थे। परिणाम स्वरूप भगवान ऋषभदेव को एक वर्ष से अधिक समय तक निराहार रहना पड़ा और अक्षय तृतीया वाले दिन गन्ने के रस से उन्हीं के प्रपोत्र के हाथों उनका पारणा हुआ। इसलिए इस पर्व पर गन्ने के रस का भी विशेष महत्व है। वर्ष भर तपस्या करने वालों का पारणा गन्ने के रस से ही किया जाता है।
विज्ञापन

एसएस जैन सभा चंडीगढ़ की ओर से 30 अप्रैल को सेक्टर-18 के जैन स्थानक में विराजित आगम ज्ञाता उपाध्याय प्रवर जितेंद्र मुनि महाराज ठाणे-6, आगम रसिका ज्ञान महोदधि, महासाध्वी संतोष महाराज ठाणे-2, मधुर भाषी महासाध्वी पीयूष दर्शना महाराज ठाणे-2 एवं प्रवचन प्रभाविका जैन ज्योति उपप्रवर्तिनी, महासाध्वी करुणा महाराज ठाणे-4 के सान्निध्य में पारणा महोत्सव होगा। इसके बाद प्रवचन कार्यक्रम होगा। कार्यक्रम में चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया समारोह के मुख्य अतिथि होंगे।
सभा के प्रचार सचिव नीरज जैन ने बताया कि वर्ष भर चलने वाली तपस्या को वर्षीतप कहा जाता है। अक्षय तृतीय वाले दिन पारणा करके तपस्वी यह निर्णय लेते है की इसे एक वर्ष ओर बढ़ाना है या नहीं। यह उनकी क्षमता अथवा समय पर निर्भर करता है। कुछ तपस्वी तो 20 वर्षों से अधिक समय से वर्षीतप की तपस्या कर रहें है। उन्होंने कहा कि इस बार 150 तपस्वी पारणा करेंगे। इस आयोजन में चंडीगढ़ के अलावा काफी संख्या में तपस्वी बाहर से पारणा करने आएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें