जज शेहराम सरवर ने अपने आदेश में कहा कि आयशा ने अपनी इच्छा के अनुसार इस्लाम धर्म अपनाने के बाद एक मुस्लिम व्यक्ति से निकाह किया है। वहीं युवती के परिवार ने अदालत से गुहार लगाई थी कि वह नाबालिग है। वह अपने फैसले खुद नहीं कर सकती। परिजनों ने जगजीत कौर के स्कूल छोड़ने का एक प्रमाणपत्र भी अदालत में पेश किया था।
दूसरी तरफ, उसके पति मोहम्मद हसन ने आयशा की एक ऑसिफिकेशन टेस्ट रिपोर्ट अदालत में पेश किया, जिसमें वह वयस्क बताई गई थी। जज ने लड़की के भाई के वकील से यह साबित करने को कहा कि वह नाबालिग है। इस केस में पाकिस्तान के पूर्व अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री खलील ताहिर सिंधु के वकील ने तर्क दिया कि स्कूल छोड़ने के प्रमाण पत्र ने उनकी कम उम्र साबित कर दी है।
न्यायाधीश ने कहा कि लड़की की उम्र को एक पर्याप्त दस्तावेज के साथ पेश करना चाहिए था। इस मामले पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक ट्वीट कर जगजीत कौर के परिवार को पंजाब आकर बसने की पेशकश भी की थी। जगजीत कौर के पिता गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब में ग्रंथी हैं।