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कांट्रैक्ट महिला शिक्षकों के लिए बड़ी खुशखबरी

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पंजाब में सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) में कांट्रैक्ट पर काम कर रही महिला शिक्षिकाओं को मातृत्व के लिए 180 दिन की छुट्टी मिलेगी। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मातृत्व के लिए छुट्टी पर लगी रोक हटा दी है। इस छुट्टी पर हाईकोर्ट ने 26 जुलाई 2013 को रोक लगा दी थी।
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महानिदेशक स्कूल शिक्षा-कम-स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर सर्व शिक्षा अभियान ने एक मार्च 2013 को आदेश जारी किया था कि कांट्रैक्ट पर काम कर रही महिला शिक्षिकाएं मातृत्व के लिए केवल 90 दिन की छुट्टी की पात्र होंगी।

कांट्रैक्ट पर काम कर रही महिला शिक्षक रीना सिंगला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस आदेश को चुनौती दी थी। उन्होंने 180 दिन की छुट्टी का प्रावधान बनाने की मांग की थी। हाईकोर्ट की एकल बेंच ने याचिका मंजूर करते हुए एसएसए में ठेके पर लगी शिक्षिकाओं को 180 दिन की छुट्टी का पात्र ठहराया था।
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एकल बेंच के इस फैसले को एसएसए अथॉरिटी पंजाब ने डिवीजन बेंच में अपील के माध्यम से चुनौती दी थी। दलील दी थी कि केंद्र सरकार के नियम एसएसए पंजाब पर आटोमैटिकली लागू नहीं होते, लिहाजा एसएसए में कांट्रैक्ट पर काम करने वाली शिक्षिकाओं को केवल 90 दिनों की छुट्टी ही मिल सकती है। डिवीजन बेंच ने इस दलील पर 180 दिन की छुट्टी पर रोक लगाते हुए कहा था कि 90 दिन की छुट्टी के बाद यदि छुट्टी ली जाती है तो इस अतिरिक्त समय के वेतन पर रोक जारी रहेगी।

इसी बीच सर्व शिक्षा अभियान में काम करने वाली चार अन्य कांट्रैक्ट महिला शिक्षिकाओं ने प्रतिवादी बनने की अर्जी दी। उन्होंने दलील दी कि चार मार्च 2013 को केंद्रीय मानव संसाधन विकास विभाग के अवर सचिव राजेंद्र प्रसाद ने पंजाब के तत्कालीन महानिदेशक एसएसए को एक पत्र भेजा था। पत्र में कहा गया था कि एसएसए में केंद्र सरकार राज्यों को अतिरिक्त शिक्षक मुहैया कराती है। इनका वेतन व सेवा शर्तें राज्य सरकार के शिक्षकों के सेवा नियमों के समान हैं। ऐसे में एसएसए के लिए कोई अलग वेतनमान या भर्ती नियम नहीं हैं।

इस दलील के साथ श्िािक्षकाओं ने कहा कि जब उनका वेतन समान है, सेवा नियम राज्य के नियमों के बराबर हैं और उनके लिए कोई अलग से नियम नहीं हैं, तो मातृत्व के लिए भी 180 दिन की छुट्टी मिलनी चाहिए। इस दलील पर हाईकोर्ट ने 90 दिनों की छुट्टी के बाद की छुट्टी के वेतन पर लगी रोक हटा दी है। इसके अलावा यह याचिका सुनवाई के लिए एडमिट कर ली है। यह याचिका अब क्रम के अनुसार ही सुनवाई के लिए आएगी। फिलहाल, हाईकोर्ट की ओर से रोक हटाने के चलते एसएसए में कांट्रैक्ट पर लगी महिला शिक्षिकाओं को राहत मिल गई है।
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