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वाहन डेढ़ लाख, अधिकारी मात्र 4

Mon, 05 May 2014 04:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथल
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जिले की सड़कों पर हर रोज कोई न कोई व्यक्ति हादसों का शिकार हो रहा है। ट्रैफिक विभाग आए दिन होने वाली इन दुर्घटनाओं में लगाम लगाने में पूरी तरह से नाकाम है।
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दरअसल, विभाग का हादसे रोकने में अहम रोल हो सकता है, लेकिन उसके पास स्टॉफ ही न के बराबर है। जो स्टॉफ है, उसका ज्यादातर समय कागजी कार्रवाई में लगा रहता है।

ऐसे में सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों पर नियंत्रण अनियंत्रित होता जा रहा है। जिसका नतीजा सड़कों पर हर रोज होने वाले हादसों में लोगों की जान जा रही है।

आरटीए कार्यालय में स्टॉफ का टोटा

आरटीए कार्यालय में स्टॉफ के नाम पर सचिव आरटीए, एक सहायक एवं दो क्लर्क, एक चौकीदार, दो चतुर्थ श्रेणी एवं एक स्वीपर है। जबकि यहां कम से कम दो सहायक, एक सचिव सहायक, दो क्लर्क के पद खाली पड़े हैं।

वहीं सरकार द्वारा स्वीकृत किए गए नए पदों पर भी अभी तक भर्ती नहीं हुई है। सचिव आरटीए के पास कैथल एवं जींद दोनों जिलों का कार्यभार है। दो जिलों में लाखों की संख्या में वाहनों पर नियंत्रण की केवल कल्पना ही की जा सकती है।

साल दर साल बढ़ रहे वाहन

जिले में आरटीए कार्यालय में तो स्टॉफ वर्ष दर वर्ष घट रहा है। जबकि वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आरटीए कार्यालय से जारी होने वाले भारी वाहनों के रजिस्ट्रेशन में जिले भर में करीब 12 हजार वाहन रजिस्टर्ड हैं। जबकि एसडीएम कार्यालय में भी वाहनों का नंबर ‘ए’ से शुरू होकर ‘आर’ तक पहुंच गया है।

एक अनुमान के अनुसार एसडीएम कार्यालय में करीब एक लाख 30 हजार से ज्यादा वाहन रजिर्स्ड हैं। हर माह 1500 से ज्यादा वाहन रजिस्टर्ड हो रहे हैं। ये तो वाहन वे हैं जो जिले में रजिर्स्ड हैं। इसके अलावा देश भर से हर रोज आने-जाने वाले वाहनों की संख्या मिलाकर यह लाखों पार कर जाती है।
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नहीं मिलता वाहनों की जांच का समय

स्टॉफ के अभाव में कर्मचारियों को वाहनों की जांच का समय नहीं मिलता। इसी विभाग को स्कूल बसों में की जा रही नियमों की पालना, भारी वाहनों में वजन, बड़े वाहनों के कागजात की जांच का कार्य किया जाता है।

कार्यालय में वाहनों का रजिस्ट्रेशन, नवीनीकरण, निजी बसों के रूट परमिट, भारी वाहनों के लिए लाइसेंस जारी किए जाने जैसे कई प्रकार के कार्यों के लिए स्टॉफ काफी कम है। जिस कारण कर्मचारी कार्यालय में कागजी काम करने में ही लगे रहते हैं, जिस कारण सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों की जांच के लिए समय न के बराबर निकल पाता है।

जिले में एक साल में 120 लोगों की हादसों में मौत
जिले में एक साल में लगभग 120 से ज्यादा लोगों की मौत होती है। इस बार भी जनवरी माह से लेकर अब तक 45 लोगों की सड़क हादसों में मौत हो चुकी है। जबकि पिछले साल यह 120 से ज्यादा थी।
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