भाजपा ने चुनाव में प्रचार तंत्र और दूसरे माध्यमों से प्रदेश के लोगों को गुमराह करने का भरसक प्रयास किया। भाजपा द्वारा पांच वर्ष के कार्यकाल की नाकामियों को छुपाने के लिए धारा 370 और एनआरसी जैसे दूसरे राष्ट्रीय मुद्दों को उछाला गया।
मगर भाजपा हरियाणा के किसान, मजदूर, व्यापारी, युवा, कर्मचारी, किसान, महिला समेत किसी भी वर्ग के दर्द को नहीं समझ पाई। यही कारण है कि भाजपा बहुमत के लिए तरस गई। यदि भाजपा को बनावटी चुनावी सर्वेक्षणों का सहारा ना मिला होता तो प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होती।
किसानों का कितना धान खरीदा गया, इसकी जांच होनी चाहिए
उन्होंने कहा कि सरकार के जनविरोधी फैसलों के कारण युवाओं को परीक्षा देने के लिए 250 किलोमीटर दूर दौड़ाया जाता है, फिर बाद में उस फैसले को सुधारने की बात कही जाती है। किसानों का धान खरीदने के मामले में भी सरकार का कुछ ऐसा ही जनविरोधी फैसला सामने आया। इस मामले की जांच होनी चाहिए कि हरियाणा के किसानों का कितना धान खरीदा गया।
साजिश के तहत सरकार किसानों को मंडियों के अंदर तक नहीं जाने दे रही है। इस मौके पर असंध विधायक शेरसिंह गोगी, साढ़ौरा विधायक रेणु बाला, कालका विधायक प्रदीप चौधरी, रामकिशन गुर्जर, बजरंग दास गर्ग, डॉ. अजय चौधरी, जगन्नाथ, लाल बहादुर खोवाल सहित कई नेता व कार्यकर्ता मौजूद रहे।