बिना चिन्ह के समर्थित उम्मीदवार उतारने से पार्टी कार्यकर्ता, पदाधिकारी चुनाव में अधिक रूचि नहीं लेते हैं। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ उतरने वाले कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। कुछ विधायकों ने यह सुझाव दिया कि नगर परिषद व नगरपालिका अध्यक्ष के चुनाव ही पार्टी चिन्ह पर लड़े जाएं।
पार्षद का चुनाव पार्टी अपने चिन्ह पर न लड़े। इसके साथ ही भाजपा की गतिविधियों और चुनाव को लेकर फैसलों पर पैनी निगाह रखी जाए। उसके अनुसार ही पार्टी अपनी रणनीति बनाए ताकि भाजपा को मात दी जा सके।
कुलदीप की नाराजगी बरकरार, सैलजा के तेवर कड़े
कुलदीप बिश्नोई की नाराजगी बरकरार है। प्रदेशाध्यक्ष न बनाए जाने के बाद वह पार्टी के किसी कार्यक्रम और बैठक में शामिल नहीं हुए हैं। वह राहुल गांधी से मुलाकात करने के बाद ही अपनी अगली रणनीति का खुलासा करेंगे। राहुल ने अभी उन्हें मिलने का समय नहीं दिया है। प्रदेश प्रभारी बंसल मुलाकात का समय तय कराने में लगे हुए हैं। प्रदेशाध्यक्ष पद से हटने के बाद सैलजा ने भी कड़े तेवर अख्तियार किए हैं। वह भी पार्टी की बैठकों से अभी तक दूर रही हैं। नए प्रदेशाध्यक्ष के ताजपोशी कार्यक्रम में वह तय समय पर पहुंची थीं लेकिन कार्यक्रम 5 घंटे लेट होने के कारण वह पहले ही निकल गईं।