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कोटखाई हिरासत मौत मामला: पूर्व आईजी जहूर हैदर जैदी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत

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चंडीगढ़। हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित कोटखाई गैंगरेप प्रकरण से जुड़े हिरासत में मौत मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व आईजी जहूर हैदर जैदी को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा के खिलाफ दाखिल उनकी अपील लंबित रहते सजा निलंबित कर दी है। अदालत ने कहा कि किसी से जुर्म कबूल करवाने के लिए उसकी हत्या किए जाने की सीबीआई की दलील प्रथम दृष्टया संतोषजनक नहीं लगती। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी महत्वपूर्ण माना कि मौत के वक्त पर जैदी छुट्टी पर थे और पुलिस स्टेशन में मौजूद नहीं थे।
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हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीबीआई का पूरा मामला इस आधार पर टिका है कि आरोपी सूरज पर दबाव बनाकर कबूलनामा कराने के लिए टॉर्चर किया गया जिससे उसकी मौत हुई लेकिन अदालत के अनुसार, यह तर्क स्वतः ही सवालों के घेरे में आता है कि कबूलनामा लेने के लिए किसी की जान लेने की मंशा कैसे हो सकती है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि अभियोजन के रिकॉर्ड के अनुसार घटना के समय जैदी न तो ड्यूटी पर थे और न ही संबंधित थाने में उनकी मौजूदगी थी।
उल्लेखनीय है कि सीबीआई की विशेष अदालत चंडीगढ़ ने इसी वर्ष जनवरी में कोटखाई गैंगरेप के एक आरोपी सूरज की पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में जहूर हैदर जैदी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ जैदी ने हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दाखिल की थी और अपील के निपटारे तक सजा निलंबन की मांग की थी। इस याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 9 दिसंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था जिसे अब सुनाते हुए सजा निलंबित करने का आदेश दिया गया।
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क्या था मामला
कोटखाई मामला वर्ष 2017 में सामने आया था जब हिमाचल प्रदेश के कोटखाई क्षेत्र में एक छात्रा के साथ गैंगरेप और हत्या की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस केस में आरोपी सूरज की पुलिस हिरासत में संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी जिसके बाद मामला पूरी तरह पलट गया। हिरासत में मौत को लेकर तत्कालीन आईजी ज़हूर हैदर जैदी सहित कई पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगे। बाद में जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई की जांच के बाद दाखिल आरोपपत्र के आधार पर विशेष अदालत ने जैदी समेत कुल आठ आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
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