डोपिग के दोषी कैसे बनते हैं और इसके क्या लक्षण हैं? एंटी डोपिंग जागरूकता वर्कशॉप में इसके बारे में विस्तार से बताया गया। जीत की खुशी के लिए स्टेयराइड लेने वाले खिलाड़ी अक्सर अपनी जिंदगी में आने वाली खुशियां हार जाते हैं। स्टेयराइड के इस्तेमाल से महिला खिलाड़ियों में जहां बांझपन तो पुरुषों में नपुंसकता का खतरा रहता है।
मंगलवार को राजीव गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में साई नेशनल बॉक्सिंग एकेडमी में एंटी डोपिंग जागरूकता पर वर्कशाप हुई। इसमें नाडा के चीफ साइंटिस्ट डॉ. अंकुश गुप्ता ने खिलाड़ियों को डोपिंग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डोपिंग में प्रतिबंधित दवाईयों की लिस्ट बनाई गई है। इन दवाईयों की जानकारी हर एक खिलाड़ी को होनी चाहिए। बताया कि एनाबोलिक एंड्रोजेनिक स्टेयराइड सबसे ज्यादा हानिकारक है।
इनमें एक्सोजेनियस इसलिए खिलाड़ी लेते हैं, जिससे वह उन पदार्थों को शरीर में ला सके जो हमारा शरीर नहीं बनाता है। जबकि एंडोजेनियस का इस्तेमाल शरीर में बनने वाले पदार्थों की मात्रा को तेजी से बढ़ाने के लिए होता है। इसके एक नियमित मात्रा में शरीर के अंदर तत्व पाए जाते हैं तो वह डोपिंग में नहीं आता है और उससे ज्यादा मिलते हैं तो वह डोपिंग में आ जाता है।
डोप टेस्ट के दौरान पता चल जाता है कि कितना स्टेयराइड बाहर से लिया गया है और शरीर में उसकी कितनी मात्रा है। उन्होंने बताया कि इससे पुरुषों में महिलाओं की तरह ब्रेस्ट डेवलेप हो जाते हैं, साथ ही स्पर्म कम होने से नपुंसकता का आ जाती है। महिलाओं की आवाज में भारीपन के साथ ही सिर के बाल झड़ने शुरू हो जाते हैं। चेहरे और शरीर पर इतने बाल बढ़ने लगते हैं कि शेविंग तक की नौबत आ जाती है। इसके अलावा प्रेग्नेंसी नहीं होने से बांझपन का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।
मेडिसिन हेल्थ के लिए लें न कि मेडिसिन का नशा करें
डोपिंग टेस्ट
अस्थमा पीड़ित खिलाड़ियों के लिए उन्होंने कहा कि उनको डॉक्टर दवाई देते है तो वह नियमित मात्रा में ले सकते हैं। वह डोपिंग में नहीं आएगी। इसके लिए डोप टेस्ट लेते समय डॉक्टरी रिपोर्ट के साथ ही फार्म में भरना होगा कि उन्होंने बीमारी के कारण दवाई का सेवन किया है।
डॉ. अंकुश गुप्ता ने बताया कि कॉफी, खांसी का सिरप, जोड़ों में लगाया जाने वाला पेन किलर इंजेक्शन, पेन किलर टेबलेट भी डोपिंग के दायरे में नहीं है। बशर्ते यह नियमित मात्रा में लिया जाए न कि नशे के तौर पर। उन्होंने बताया कि कोई खिलाड़ी बीमार होता है तो वह डॉक्टर के पास जाकर सबसे पहले अपने बारे में बताए। जिससे डॉक्टर उनको वह दवाई देने से बचे, जिनसे वह डोपिंग में फंस सकता है।
उसके बावजूद भी उसे ऐसी दवाई देने की जरूरत होती है तो खिलाड़ी को तुरंत ही नाडा में एक प्रार्थना पत्र देकर उसकी अनुमति लेनी चाहिए। जहां तुरंत सुनवाई होगी और उनको अनुमति दी जाएगी। इसके बाद उनको डोप टेस्ट के समय उसमें छूट मिलेगी। इस मौके पर नेशनल बाक्सिंग एकेडमी के सीओओ सतीश सरहदी, कोच जगदीश सिंह और ब्रजभूषण मोहंती भी मौजूद रहे।
डोप टेस्ट से इंकार करने वाला भी होगा डोपिंग का दोषी
डोपिंग टेस्ट
नाडा के चीफ साइंटिस्ट डॉ. अंकुश गुप्ता ने बताया कि डोप टेस्ट से इंकार नहीं करना चाहिए। डोप टेस्ट न कराने पर उस खिलाड़ी को को भी दोषी माना जाएगा और सजा होगी। वहीं उन्होंने प्रतिबंधित दवाओं के वाश आउट के बारे में बताया कि इंजेक्शन लगाने पर दवा शरीर में ज्यादा समय तक रहती है और अन्य तरीके से खाने पर कम समय शरीर में रहता है।