पंजाब कैबिनेट में मंगलवार को शामिल किए जाने वाले तोता सिंह, डॉ. दलजीत सिंह चीमा और सोहन सिंह ठंडल को मंत्री पद के रूप में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के प्रति वफादारी का इनाम मिला है।
वर्ष 2002 में कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में बनी कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान बादल, उनके पुत्र सुखबीर बादल सहित कई अकाली नेताओं पर भ्रष्टाचार के अलग-अलग मामले दर्ज किए गए थे। इन नेताओं में जत्थेदार तोता सिंह और सोहन सिंह ठंडल भी शामिल थे।
दो नेताओं को हुई सजा, एक बरी
इन मामलों में तोता सिंह और सोहन सिंह ठंडल को क्रमश: 2011 और 2012 में सजाएं भी हुईं। बाद में तोता सिंह को जमानत मिल गई जबकि ठंडल बरी हो गए। उस वक्त डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने पूरी वफादारी के साथ पार्टी के कामकाज को संभाला और मीडिया से लेकर पार्टी संगठन में निष्ठा से काम किया।
जिस वक्त भ्रष्टाचार के मामले में बादल पिता-पुत्र न्यायिक हिरासत में पटियाला सेंट्रल जेल में थे, उस समय भी डॉ. चीमा ने न केवल पार्टी के प्रेस सचिव के रूप में सक्रिय भूमिका निभाई, बल्कि गुरचरण सिंह टोहड़ा सहित अन्य शिअद नेताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। यही समय था जब बादल परिवार को डॉ. चीमा के प्रति ऐसा विश्वास पैदा हुआ कि तब से अब तक वे लगातार पार्टी के प्रवक्ता बने रहे।
बादल के वफादार सिपाही हैं दो मंत्री
उधर, तोता सिंह और ठंडल भी शिअद के वफादार सिपाहियों के रूप में डटे रहे हैं। 2012 में अकाली-भाजपा गठबंधन के लगातार दूसरी बार सत्ता में आने के बाद बादल ने तोता सिंह को कैबिनेट मंत्री और ठंडल को मुख्य संसदीय सचिव के रूप में अपने साथ रखा।
डॉ. चीमा को उस वक्त मंत्री या मुख्य संसदीय सचिव न बनाए जाने की वजह से लोगों को हैरानी जरूर हुई थी, लेकिन अब उन्हें कैबिनेट में लेने का फैसला लेकर बादल ने उनके प्रति अपने विश्वास का प्रमाण दिया है।
खात बात यह भी है कि तोता सिंह की सजा से संबंधित केस अदालत में विचाराधीन होने के बावजूद उन्हें मंत्री बनाए जाने के फैसले पर अंगुलियां उठ रही हैं, लेकिन बादल ने अपने निर्णय से स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अपने सच्चे सहयोगियों को हमेशा याद रखते हैं।
जीरा के इस्तीफे की चर्चा, शिअद ने किया इंकार
पंजाब कैबिनेट में मंगलवार को शामिल होने वाले मंत्रियों की सूची में अपना नाम न आने की वजह से शिअद के वरिष्ठ विधायक हरी सिंह जीरा के नाराज होने की चर्चा है।
सूत्रों के मुताबिक तोता सिंह, सोहन सिंह ठंडल और डॉ. दलजीत सिंह चीमा के नामों वाली सूची जारी होने के बाद जीरा सोमवार शाम को मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से मिले और उन्हें अपनी नाराजगी से अवगत करवाया। चर्चा है कि इस दौरान उन्होंने अपनी पत्नी व पुत्र सहित पार्टी के पदों से इस्तीफा दे दिया, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई।
हरी सिंह जीरा से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई। दूसरी ओर, इस बारे में बात किए जाने पर शिरोमणि अकाली दल के महासचिव हरचरन सिंह बैंस ने कहा कि जीरा के इस्तीफे की चर्चा झूठ है तथा इससे संबंधित चर्चाएं सिर्फ अफवाह हैं।