पंथक बेल्ट माझा
पंजाब का माझा क्षेत्र पंथक मुद्दों को लेकर हमेशा सरगर्म रहा है। पंजाब का माझा क्षेत्र राजनीति की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इसे पंजाब की 'पंथक' बेल्ट या बॉर्डर बेल्ट भी कहा जाता है। माझा में पड़ते अमृतसर में श्री हरिमंदिर साहिब के कारण दुनियाभर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। इसलिए इस सीट पर देशभर की नजर रहती है।
माझा बेल्ट में पंथक व सुरक्षा के मुद्दे ही राजनीति का रुख तय करते हैं। यहां तीन लोकसभा सीटें हैं। इनमें से दो कांग्रेस, जबकि एक भाजपा के पास है। गुरदासपुर सीट से 2019 में भाजपा के सनी देयोल जीते थे। उन्होंने कांग्रेस के सुनील जाखड़ (अब भाजपा में) को 82,459 वोट के अंतर से हराया था। वहीं, अमृतसर से कांग्रेस के गुरमीत सिंह औजला ने भाजपा के हरदीप पुरी को 99,626 वोटों से मात दी थी। खडूर साहिब सीट कांग्रेस के जसबीर सिंह गिल ने जीती थी। उन्होंने शिअद की बीबी जगीर कौर को 1,40,573 वोट के अंतर से शिकस्त दी थी।
एससी बहुल दोआबा
वहीं, दोआबा बेल्ट में अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय की एक बड़ी आबादी है। पंजाब की आबादी में एससी समुदाय की हिस्सेदारी करीब 32 फीसदी है, जो देश में सबसे ज्यादा है।
2019 में कांग्रेस ने मोदी लहर में भी पा ली थी जीत
2019 के लोकसभा चुनाव में, कांग्रेस ने पूरे उत्तर व मध्य भारत में मोदी लहर को पीछे छोड़ते हुए पंजाब में आठ सीटें- लुधियाना, आनंदपुर साहिब, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब, फरीदकोट (पांचों मालवा क्षेत्र से) और अमृतसर व खडूर साहिब (माझा क्षेत्र) के अलावा जालंधर (दोआबा क्षेत्र) जीतीं थीं। हालांकि 2023 को उपचुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) ने जालंधर सीट पर कब्जा कर लिया था। इस चुनाव में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने मालवा क्षेत्र में बठिंडा व फिरोजपुर सीटें जीती थीं जबकि आप को मालवा क्षेत्र की संगरूर सीट पर जीत के साथ संतोष करना पड़ा था। 2022 में आप द्वारा संगरूर सीट छोड़े जाने के बाद उपचुनाव में शिअद (अमृतसर) ने जीत हासिल की थी। भाजपा ने होशियारपुर (दोआबा) और गुरदासपुर (माझा) सीटें जीती थीं।
इस बार के मुख्य पंथक मुद्दे
- बेअदबी मामले के दोषियों को सजा देना। पीड़ितों के साथ इंसाफ करना।
- देशभर की जेलों में सजा काट रहे बंदी सिंहों को रिहा करना।
- बॉर्डर बेल्ट में युवाओं को नशे के रुझान से रोकना।
- सीमावर्ती इलाकों में लघु उद्योग को विकसित करना।
- कंटीली तार के पार भूमि के मालिकों की समस्याओं का समाधान।
- ग्रामीण इलाकों में मूलभूत ढांचागत विकास में तेजी लाना।