घुटना ट्रांसप्लांट पर होने वाले खर्च पर पीजीआई सहित दूसरे अस्पतालों ने भले ही कोई नियम न बनाएं हों, लेकिन एक्स-सर्विसमैन कन्ट्रिब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) और इंप्लायज स्टेट इंश्योरेंस कारपोरेशन (ईएसआईसी) ने खर्च के लिए नियम तय कर रखे हैं। ईसीएचएस ने घुटना ट्रांसप्लांट के लिए 65 हजार रुपये तय कर रखे हैं। इसमें ट्रांसप्लांट के समय लगने वाली सीमेंट की इम्प्लांट बोन भी शामिल है। ईसीएचएस पूर्व सैनिकों के इलाज में खर्च होने वाली राशि का भुगतान करता है।
ईसीएचएस के रेट कई सारी स्टडी और रिसर्च के बाद विशेषज्ञ तय करते हैं। जाहिर है कि ईसीएचएस को अच्छी तरह से मालूम है कि घुटना ट्रांसप्लांट में कितना खर्च आता है, तभी उसका मूल्य 65 हजार रुपये तय किया गया है। इसी तरह से ईएसआईसी ने भी घुटना ट्रांसप्लांट के लिए 72 हजार रुपये का रेट तय रखा है। इसमें टैक्स और बोन सीमेंट भी शामिल है। अब सवाल यह उठता है कि जब इन सरकारी एजेंसियों ने घुटना ट्रांसप्लांट के रेट फिक्स कर रखे हैं तो पीजीआई और मेडिकल कालेज ने क्यों नहीं इस तरह का कदम उठाया।
मिली बिल की कापी, डिस्ट्रीब्यूटर के पास कितने रुपये में आता है
डिस्ट्रीब्यूटर के पास घुटना इम्प्लांट कितने रुपये पहुंचता है, इसका एक सुबूत अमर उजाला के पास है। एक कंपनी की ओर से डिस्ट्रीब्यूटर को भेजे गए इम्प्लांट के बिल की कापी है। उसे देखने से साफ तौर पर पता चलता है कि एक इम्प्लांट की कीमत कितने रुपये का होता है। कंपनी की कॉपी के मुताबिक एक इम्प्लांट की कीमत 50 हजार रुपये से भी कम है। इसी तरह से एक कंपनी ने ट्राइसिटी के एक नामी हास्पिटल को कोटेशन भेजी है, उसमें भी घुटना इम्प्लांट के रेट 65 हजार रुपये दिए गए हैं।