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किसान आंदोलन : दिल्ली की देहरी पर किसान, अब संवाद से संग्राम को शांत करने की कोशिश

Sat, 28 Nov 2020 06:25 PM IST
ajay kumar मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • दिल्ली सीमा पहुंचे हरियाणा-पंजाब के किसान, राजघाट, जंतर-मंतर और रामलीला मैदान में धरने की जिद पर अड़े
  • संयम बरत रही हरियाणा सरकार, अब किसानों को केंद्र से शांतिपूर्वक बातचीत के लिए समझाने में जुटी
  • गेंद अब केंद्र के पाले में, अपनी मुख्य मांगों को लेकर अड़े हैं हरियाणा और पंजाब के किसान संगठन
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किसान आंदोलन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अपनी मांगों को बुलंद कर आगे बढ़ रहे किसानों की हठ के आगे आखिरकार हरियाणा पुलिस को झुकना पड़ा है। सूबे के विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगाई गई तमाम बैरिकेडिंग हटा ली गई है और किसानों के लिए दिल्ली के रास्ते खोल दिए गए हैं। हरियाणा और पंजाब के काफी संख्या में किसान दिल्ली के विभिन्न बॉर्डरों पर (अधिकतर सिंधु और टिकरी सीमा) अपने अन्य किसान साथियों के इंतजार में खड़े हैं। 

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बहुत से किसान जत्थे अभी भी ट्रैक्टर-ट्रालियों पर हरियाणा और पंजाब से दिल्ली के लिए निकले हुए हैं। दोनों सूबों के यह किसान राजघाट, जंतर-मंतर और रामलीला मैदान में धरने की जिद पर खड़े हैं। मगर दिल्ली में उन्हें निरंकारी मैदान और बुराड़ी मैदान में एकत्रित होने का ऑफर दिया गया है।

राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिमन्यु कोहाड़ ने बताया कि आंदोलन के लिए गठित संयुक्त किसान मोर्चा के अंतर्गत विभिन्न किसान जत्थेबंदियों के वरिष्ठ नेताओं की बैठक होगी, जिसमें यह तय किया जाएगा कि किसानों को दिल्ली में कहां बैठकर अपना अनिश्चिकालीन धरना देना है। 

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उधर, शुक्रवार दोपहर तक फिर हरियाणा पुलिस ने किसानों को विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों पर वॉटर कैनन और आंसू गैस से दिल्ली जाने से रोकने का प्रयास भी किया। इस दौरान पुलिस और किसानों के बीच टकराव और पथराव भी हुआ। इस विरोध के दौरान किसानों को समझाते हुए कुछेक नाकों पर तो पुलिस अफसरों ने किसान नेताओं के आगे हाथ जोड़कर उनसें वापस लौटने का अनुरोध भी किया। 

मगर दिल्ली कूच की जिद पर अड़े किसान बैरिकेडिंग तोड़ आगे बढ़ते गए। हालात बिगड़ते देख पुलिस का रवैया भी नरम पड़ गया और प्रदेशभर के सभी नाके किसानों के लिए खोल दिए गए। पुलिस प्रवक्ता के अनुसार उन्हें बॉर्डर खोलने के आदेश मिल चुके हैं। इसलिए बैरिकेडिंग हटा ली गई है। ट्रैफिक खुल गया है और हम पुलिस जाम का खत्म करवा यातायात सुचारू करवा रही है। फिलहाल किसी किसान को नहीं रोका जाएगा।

कृषि कानून वापसी के संकेत नहीं, किसानों को बातचीत से मनाने का होगा प्रयास
भारी रूकावटों के बावजूद हरियाणा और पंजाब के किसान दिल्ली के देहरी पर पहुंच चुके हैं। केंद्र सरकार भी उनसे बातचीत के लिए तैयार है। मगर अभी तक जो संकेत सामने आ रहे हैं, उससे ये साफ है कि सरकार कानून वापसी के मूड में नहीं हैं, बल्कि किसानों से संवाद कर उनके संग्राम को शांत करने की कोशिश की जाएगी। किसानों को बातचीत के सहारे शांत करने की कोशिशों में केंद्र के साथ-साथ हरियाणा सरकार भी जुटी है।
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि किसानों को किसी के बहकावे में आने की जरूरत नहीं है। किसान जायज मुद्दों पर केंद्र से बातचीत करें। केंद्र सरकार बातचीत के लिए हमेशा तैयार है। किसी भी मुद्दे का हल आंदोलन नहीं है। इसका हल सिर्फ और सिर्फ बातचीत से ही निकलेगा। सरकार का फैसला किसानों के हित में है।

उधर, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी कृषि कानून वापस न होने का संकेत देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि नए कानून बनाना समय की आवश्यकता थी। आने वाले कल में ये नए कृषि कानून किसानों के जीवन स्तर पर क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले हैं। इसलिए किसानों से बातचीत कर उनका भ्रम दूर करेंगे।

आंदोलन को मिल रही युवाओं की बड़ी ताकत
किसानों के इस आंदोलन को युवाओं की बड़ी ताकत मिल रही है। विभिन्न किसान जत्थेबंदियों के साथ चले रहे किसानों में काफी संख्या में युवा किसान हैं, जो अंग्रिम पंक्ति की रूकावटों से टकरा रहे हैं। हरियाणा में विभिन्न नाकों पर रास्ता बनाने की बड़ी जिम्मेदारी भी इन्हीं युवा किसानों को सौंपी गई है। 

अब दिल्ली सीमाओं पर भी ये युवा किसान वरिष्ठ किसान नेताओं के दिशा-निर्देश पर ही काम कर रहे हैं। वरिष्ठ किसान नेताओं का कहना है कि युवा किसानों को इस आंदोलन में शांतिपूर्वक बिना किसी हिंसा के काम करने को कहा गया है और वे इस जिम्मेदारी को निभा रहे हैं। जहां कहीं भी पुलिस से टकराव हुआ, उसकी शुरूआत पुलिस ने ही की। मगर भीड़ में शामिल माहौल को हिंसक बनाने वालो असमाजिक तत्वों के प्रति भी हम गंभीर हैं।
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